28 July, 2025
हिमालय की गोद में स्थित नूरपुर का श्रीबृजराज स्वामी मंदिर एक ऐसा दिव्य तीर्थ स्थल है, जहां भक्ति और इतिहास एक साथ जीवंत हो उठते हैं। यह मंदिर न केवल श्रीकृष्ण जी की पूजा का प्रमुख केंद्र है, बल्कि यहां भक्तिरस की प्रतीक मीराबाई जी की भी सदियों से विधिवत पूजा की जा रही है — जो इसे भारत के अन्य मंदिरों से अलग और अनुपम बनाता है।
16वीं शताब्दी में राजा जगत सिंह द्वारा निर्मित यह मंदिर अपनी वास्तुकला, आध्यात्मिक ऊर्जा और ऐतिहासिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है। यहां श्रीकृष्ण जी और मीराबाई जी की मूर्तियाँ काले संगमरमर से निर्मित हैं, जो दिव्यता और आस्था का प्रतीक हैं। श्रद्धालुओं का मानना है कि इन मूर्तियों से चमत्कारी शक्तियों की अनुभूति होती है और मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही आत्मा शांति का अनुभव करती है।
यह मंदिर न केवल स्थानीय श्रद्धालुओं के लिए, बल्कि देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों और भक्ति-पथ के साधकों के लिए भी एक विशेष आस्था का केंद्र बन गया है। त्योहारों और विशेष आयोजनों पर यहां भव्य कीर्तन, संकीर्तन और भक्ति-सम्मेलन आयोजित किए जाते हैं, जिनमें हज़ारों की संख्या में श्रद्धालु सम्मिलित होते हैं।
श्रीबृजराज स्वामी मंदिर, नूरपुर आज भी अपने गौरवशाली इतिहास और आध्यात्मिक प्रभाव के कारण श्रद्धा, भक्ति और चमत्कारों के प्रतीक के रूप में जाना जाता है।
मंदिर में दर्शन हेतु समय:
प्रातः 6:00 बजे से सायं 8:00 बजे तक
विशेष आरती: प्रत्येक पूर्णिमा को रात्रि 7:00 बजे
श्रीबृजराज स्वामी मंदिर में 15-16 अगस्त को राज्य स्तरीय जन्माष्टमी महोत्सव,
हर रविवार को मंदिर परिसर में भंडारे व संकीर्तन का आयोजन होता है, जिसमें नूरपुर बृजराज संकीर्तन मंडली प्रभु श्रीकृष्ण की महिमा का गुणगान करती है।इस वर्ष भी, मंदिर समिति द्वारा 15-16 अगस्त को जन्माष्टमी महोत्सव राज्य स्तरीय स्तर पर भव्य रूप में आयोजित किया जा रहा है। मंदिर समिति के प्रधान देवेंद्र शर्मा ने बताया कि आयोजन की तैयारियों में प्रशासन व समिति दोनों ही जुटे हुए हैं। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से इस पावन अवसर पर मंदिर में आकर पुण्य लाभ अर्जित करने का आह्वान किया।
समिति सदस्य सुनील कुमार पिंटू ने भी बताया कि जन्माष्टमी के अवसर पर विशेष भंडारे और भजन-कीर्तन का आयोजन किया जाएगा, जिसमें श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति प्राप्त होगी।श्रीबृजराज स्वामी मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यह भक्तों को वृंदावन जैसी अनुभूति प्रदान करता है।