शिमला। हिमाचल प्रदेश में नशे की समस्या लगातार गंभीर रूप लेती जा रही है। पुलिस द्वारा की गई हालिया मैपिंग में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश की करीब 50 फीसदी पंचायतों में नशे का असर फैल चुका है। कुल 3577 पंचायतों में से लगभग 1500 पंचायतों में नशे की गतिविधियां सामने आई हैं, जबकि इनमें से 234 पंचायतें विशेष रूप से चिट्टे (हेरोइन) की चपेट में हैं।
पुलिस की जांच में यह भी सामने आया है कि कई इलाकों में युवा वर्ग तेजी से नशे की ओर बढ़ रहा है, जिससे सामाजिक ताना-बाना प्रभावित हो रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने पंचायत स्तर पर नशा निवारण समितियों का गठन किया है। इन समितियों में पंचायत प्रतिनिधियों के साथ-साथ संबंधित विभागों के अधिकारी और कर्मचारी भी शामिल किए गए हैं।
समिति का उद्देश्य पंचायतों को नशे से मुक्त रखना, नशे के कारोबार पर नजर रखना और नशे की लत के शिकार लोगों को इलाज व परामर्श के जरिए मुख्यधारा में लौटाना है। समितियां नियमित रूप से जिला स्तर पर रिपोर्ट भेजती हैं, जिसके आधार पर आगे की रणनीति बनाई जाती है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त सहायता उपलब्ध कराई जाती है।
प्रदेश के डीजीपी अशोक तिवारी ने बताया कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के निर्देशों पर यह अभियान पंचायत स्तर तक लागू किया गया है। उन्होंने कहा कि पुलिस प्रशासन नशे के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रहा है और सकारात्मक परिणाम भी सामने आ रहे हैं।
डीजीपी ने यह भी कहा कि युवाओं का सहयोग अभियान में काफी अहम भूमिका निभा रहा है। पुलिस विभाग द्वारा नशे के खिलाफ जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं, ताकि लोगों को इसके दुष्परिणामों के प्रति सतर्क किया जा सके। प्रदेश सरकार और पुलिस का दावा है कि नशे को जड़ से खत्म करने के लिए कार्रवाई और जागरूकता दोनों स्तरों पर अभियान जारी रहेगा।