फरीदाबाद। फरीदाबाद की सेशंस कोर्ट ने नाबालिग लड़की को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले जाने और उसके साथ शारीरिक संबंध बनाने के मामले में आरोपी युवक को दोषी करार दिया है। कोर्ट ने आरोपी को पॉक्सो एक्ट के तहत 10 साल की कठोर कैद की सजा सुनाई। इस फैसले में डीएनए रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों को अहम आधार माना गया।
मामले की शुरुआत 7 मार्च 2017 को हुई थी, जब पीड़िता के पिता ने भूपानी थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया था कि उनकी 15 वर्षीय बेटी को पप्पू नाम का युवक अपने साथ ले गया है। इसके बाद पुलिस ने अपहरण का केस दर्ज कर जांच शुरू की थी।
बताया जा रहा है कि बाद में पारिवारिक स्तर पर समझौते जैसी स्थिति बनने के कारण जांच धीमी पड़ गई। इसी दौरान नाबालिग लड़की आरोपी के साथ रहने लगी और उसके दो बच्चे भी हुए।
मामले में बड़ा मोड़ अप्रैल 2020 में आया, जब आरोपी पप्पू फरीदाबाद स्थित अपनी ससुराल लौट आया। आरोप है कि 12 अप्रैल 2020 को वह किशोरी को अपने साथ लेकर गया और सेक्टर-17 बाईपास के पास उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया। पीड़िता को बेहोशी की हालत में छोड़ दिया गया, जिसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इस घटना को लेकर बीपीटीपी थाने में हत्या का केस दर्ज किया गया था, जिसकी सुनवाई फिलहाल अलग अदालत में चल रही है।
इसके बाद भूपानी थाना पुलिस ने आरोपी को प्रोडक्शन वारंट पर लिया और पहले दर्ज अपहरण मामले की जांच दोबारा शुरू की। इस दौरान मामले में पॉक्सो एक्ट की धाराएं जोड़ी गईं और साक्ष्य एकत्र किए गए।
जांच के दौरान किशोरी, उसके बच्चों और आरोपी के डीएनए सैंपल लेकर जांच कराई गई। रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि बच्चों का पिता आरोपी ही है, जिससे यह साबित हो गया कि आरोपी ने नाबालिग के साथ शारीरिक संबंध बनाए थे।
डिप्टी डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी सुरेश चौधरी के अनुसार यह मामला 2019 में पॉक्सो एक्ट में हुए संशोधन से पहले का है। उस समय न्यूनतम सजा 10 साल निर्धारित थी, जबकि संशोधन के बाद इसे बढ़ाकर 20 साल कर दिया गया। पुराने प्रावधान लागू होने के कारण कोर्ट ने आरोपी को 10 साल की सजा सुनाई। फिलहाल आरोपी के खिलाफ बीपीटीपी थाने में दर्ज हत्या के मामले की सुनवाई अलग अदालत में जारी है।