Summer express,संजु ,शिमला | शिमला में हिमाचल प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में बड़ा विवाद सामने आया है, जहां मुख्य सचिव संजय गुप्ता और पूर्व मुख्य सचिवों के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। चेस्टर हिल मामले को लेकर चल रहे विवाद में संजय गुप्ता ने पूर्व मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना और आरडी धीमान समेत पूर्व रेरा चीफ पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जबकि उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज किया है।
मुख्य सचिव संजय गुप्ता ने स्पष्ट किया कि उनके खिलाफ छोटा शिमला पुलिस थाना में दर्ज शिकायत पूरी तरह से बेबुनियाद और भ्रामक है। उन्होंने कहा कि उन पर 3 एकड़ जमीन खरीदने का जो आरोप लगाया जा रहा है, वह गलत है। उनके अनुसार यह जमीन जुलाई 2025 में सरकार की विधिवत अनुमति के बाद खरीदी गई थी और इसमें किसी प्रकार की अनियमितता नहीं हुई है।
संजय गुप्ता ने दावा किया कि जमीन का कलेक्टर रेट करीब 1.10 करोड़ रुपये था, जबकि उन्होंने इसे 1.35 करोड़ रुपये में खरीदा। उन्होंने यह भी बताया कि खरीद के लिए 75 लाख रुपये उन्होंने जून में जीपीएफ से लिए थे। उनके अनुसार उनके खिलाफ शिकायत पूर्व अतिरिक्त महाधिवक्ता विनय शर्मा द्वारा प्रेरित होकर की गई है।
मुख्य सचिव ने यह भी कहा कि उनकी कार्यशैली को बदनाम करने के लिए यह पूरा प्रकरण रचा जा रहा है। उन्होंने अपने कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि बिजली बोर्ड के चेयरमैन रहते हुए उन्होंने संगठन को 5000 करोड़ रुपये के लाभ में पहुंचाया था और उनके सभी निर्णय पारदर्शिता के साथ लिए गए।
उन्होंने पूर्व मुख्य सचिवों पर आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ अधिकारियों की ‘इंटीग्रिटी डाउटफुल’ है और उन्हीं के इशारे पर उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई। साथ ही उन्होंने दावा किया कि विजिलेंस और ईडी पहले से ही इस मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच कर रहे हैं।
संजय गुप्ता ने पूर्व रेरा चीफ पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि चेस्टर हिल मामले में जो मंजूरी दी गई थी, वह पहले के कार्यकाल में दी गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ अधिकारी मुख्यमंत्री को भी गुमराह कर रहे हैं और तथ्यों को सही तरीके से सामने नहीं रखा गया।
इस पूरे घटनाक्रम ने राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था में हलचल पैदा कर दी है और मामले को लेकर आगे और राजनीतिक व प्रशासनिक प्रतिक्रियाएं आने की संभावना जताई जा रही है।