अनिल विज का खुलासा: हरियाणा में 90% वर्कस्लिप फर्जी, बड़ा घोटाला सामने आया

Karuna
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Summer Express - अनिल विज का खुलासा: हरियाणा में 90% वर्कस्लिप फर्जी, बड़ा घोटाला सामने आया

Summer Express, चंडीगढ़ |  हरियाणा के श्रम मंत्री अनिल विज ने राज्य में भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड से जुड़े वर्कस्लिप (90 दिन कार्य प्रमाण) में बड़े स्तर पर अनियमितताओं का खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि 22 जिलों में गठित जांच समितियों से प्राप्त रिपोर्ट में लगभग 90 प्रतिशत वर्कस्लिप फर्जी पाई गई हैं, जबकि केवल करीब 10 प्रतिशत ही वैध पाई गई हैं।

मंत्री विज के अनुसार, वैध पाई गई वर्कस्लिप से जुड़े श्रमिकों की आईडी जल्द ही सक्रिय की जाएगी और उनके लिए पोर्टल खोला जाएगा, ताकि वे बोर्ड की विभिन्न योजनाओं का लाभ प्राप्त कर सकें। वहीं, फर्जी पाई गई वर्कस्लिप के मामलों में संबंधित श्रमिकों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा। इसके लिए उन्हें गठित समिति या प्राधिकरण के समक्ष अपना प्रतिवेदन प्रस्तुत करना होगा।

इस मामले में विज ने एक प्रस्ताव मुख्यमंत्री को भेजा था, जिसे मंजूरी मिल चुकी है। अब इसे सरकार द्वारा गठित उच्च स्तरीय समिति के पास अनुशंसा के लिए भेजा गया है। समिति की स्वीकृति मिलने के बाद ही इस प्रस्ताव की सिफारिशों को लागू किया जाएगा।

श्रम मंत्री ने बताया कि प्रारंभिक जांच हिसार, कैथल और जींद जिलों में कराई गई थी, जहां बड़ी संख्या में गड़बड़ियां सामने आईं। इसके बाद सभी जिलों में उपायुक्तों की अध्यक्षता में समितियां गठित कर वर्कस्लिप का भौतिक और ऑनलाइन सत्यापन कराया गया। जांच में सामने आया कि कुल 21,78,523 वर्कस्लिपों में से केवल 2,70,945 सही पाई गईं, जबकि 19,07,578 वर्कस्लिप फर्जी निकलीं।

विज ने आशंका जताई कि यह मामला करीब 1500 करोड़ रुपये के घोटाले तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी जांच आगे बढ़ने पर यह राशि हजारों करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। उन्होंने कहा कि 2008 से चल रही योजनाओं की भी जांच की संभावना है।

उन्होंने यह भी कहा कि कई स्थानों पर फर्जी पंजीकरण कर अपात्र लोगों को योजनाओं का लाभ दिलाया गया, जिससे सरकार को भारी वित्तीय नुकसान हुआ है। श्रमिकों को विभिन्न योजनाओं के तहत औसतन 2.5 लाख रुपये तक का लाभ मिलता है।

अनिल विज ने स्पष्ट किया कि सरकार भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि केवल वास्तविक और पात्र श्रमिकों को ही योजनाओं का लाभ सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि कल्याणकारी योजनाओं का उद्देश्य सही मायनों में पूरा हो सके।

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