धर्मशाला, राहुल -:धर्मशाला के पर्यटन क्षेत्र मैक्लोडगंज के नडडी स्थित ऐतिहासिक डल झील में प्रस्तावित महाआरती को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। झील के किनारे बनाए जा रहे घाट का लगभग 70 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है और प्रशासन का लक्ष्य है कि इसी माह महाआरती का आयोजन किया जाए। इस आयोजन को न केवल धार्मिक महत्व से जोड़ा जा रहा है, बल्कि इसे पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए भी एक बड़ा कदम माना जा रहा है
डल झील के सौंदर्यीकरण और संरक्षण के तहत झील किनारे क्रेट वॉल (Crate Wall) का निर्माण भी तेजी से किया जा रहा है। इस कार्य का मुख्य उद्देश्य झील के किनारे खड़े देवदार के पेड़ों की जड़ों को सुरक्षित रखना है, जो समय के साथ बाहर आ गई थीं। प्रशासन का कहना है कि विकास कार्यों के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि प्राकृतिक संतुलन बना रहे।महाआरती के आयोजन से पहले झील में पानी को स्थिर रखने के लिए तीसरे ट्रायल की तैयारी भी चल रही है। इससे पहले किए गए पहले ट्रायल में करीब 20 लीकेज प्वाइंट चिन्हित किए गए थे। इसके बाद सुधार कार्य किए गए और दूसरे ट्रायल के दौरान, जो राधाष्टमी के अवसर पर हुआ था, झील में पानी सफलतापूर्वक रुक गया था। हालांकि, झील की सफाई और गाद निकालने के लिए पानी को फिर से बाहर निकाला गया था।
वर्तमान में झील से गाद निकालने का कार्य जारी है, लेकिन लगातार हो रही बारिश के कारण काम की गति धीमी पड़ गई है। प्रशासन को उम्मीद है कि मौसम अनुकूल होते ही यह कार्य जल्द पूरा कर लिया जाएगा, ताकि तीसरा ट्रायल सफलतापूर्वक किया जा सके।डल झील, जिसे “मिनी मणिमहेश” के नाम से भी जाना जाता है, धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। झील के किनारे स्थित ऐतिहासिक दुर्वेश्वर महादेव मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। हर वर्ष राधाष्टमी के अवसर पर हजारों श्रद्धालु यहां स्नान करने पहुंचते हैं। इसके अलावा, धर्मशाला आने वाले पर्यटक भी इस झील को अपनी यात्रा का अहम हिस्सा मानते हैं।प्रशासन ने झील के पुनरुद्धार और सौंदर्यीकरण के लिए विशेषज्ञों की सलाह भी ली है। इसी क्रम में ‘लेक मैन’ को भी धर्मशाला बुलाया गया था, जिनके सुझावों के आधार पर कार्य योजना तैयार की गई। इस योजना में झील की लीकेज को रोकना, आसपास के क्षेत्र को विकसित करना और इसे एक आकर्षक पर्यटन स्थल के रूप में स्थापित करना शामिल है।
बीडीओ धर्मशाला अभिनीत कात्यायन के अनुसार, अगले सप्ताह तक झील का तीसरा ट्रायल किए जाने की संभावना है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस बार भी झील में पानी पूरी तरह से रुकेगा। साथ ही, मौसम की स्थिति को ध्यान में रखते हुए महाआरती की तिथि तय की जाएगी, ताकि यह आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हो सके और झील श्रद्धालुओं व पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सके।