शिमला, 21 अप्रैल -:हिमाचल प्रदेश सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और रसायन-मुक्त खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्राकृतिक पद्धति से उगाई जाने वाली प्रमुख फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में महत्वपूर्ण वृद्धि की है। इस निर्णय से राज्य के हजारों किसानों को सीधा आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है और प्राकृतिक खेती को अपनाने के प्रति किसानों का रुझान और बढ़ेगा।
सरकार द्वारा जारी नई दरों के अनुसार, प्राकृतिक रूप से उगाए गए गेहूं की एमएसपी 60 रुपये से बढ़ाकर 80 रुपये प्रति किलोग्राम कर दी गई है। मक्की की एमएसपी में भी वृद्धि करते हुए इसे 40 रुपये से 50 रुपये प्रति किलोग्राम कर दिया गया है। चम्बा जिले की पांगी घाटी में उत्पादित जौ की एमएसपी 60 रुपये से बढ़ाकर 80 रुपये प्रति किलोग्राम कर दी गई है। इसके अतिरिक्त कच्ची हल्दी के दाम में उल्लेखनीय वृद्धि करते हुए इसे 90 रुपये से बढ़ाकर 150 रुपये प्रति किलोग्राम कर दिया गया है। वहीं, प्राकृतिक रूप से उगाई गई अदरक को 30 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से खरीदने का निर्णय लिया गया है।
राज्य सरकार ने राजीव गांधी प्राकृतिक खेती प्रोत्साहन योजना के तहत इस वर्ष व्यापक खरीद योजना तैयार की है। इसके अंतर्गत लगभग 2,000 किसानों से 400 मीट्रिक टन गेहूं, 250 मीट्रिक टन मक्की, 150 मीट्रिक टन कच्ची हल्दी और 30 मीट्रिक टन जौ खरीदने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अदरक की खरीद के लिए भी अलग से आकलन किया जा रहा है। इस पूरी योजना के लिए राज्य सरकार ने 6.95 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित किया है, जिससे प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को स्थिर बाजार और उचित मूल्य मिल सके।मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि सरकार रसायन-मुक्त और सतत कृषि प्रणाली को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि कृषि विभाग ने वर्ष 2026 तक एक लाख किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ने का लक्ष्य तय किया है, जो राज्य में टिकाऊ कृषि प्रणाली की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, हिमाचल प्रदेश में दो लाख से अधिक किसान प्राकृतिक खेती अपना चुके हैं, जिनमें से लगभग 1.98 लाख किसानों को प्रमाणित भी किया जा चुका है। राज्य की लगभग 90 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है और करीब 53.95 प्रतिशत लोग प्रत्यक्ष रूप से कृषि पर निर्भर हैं। राज्य के सकल घरेलू उत्पाद में कृषि क्षेत्र का योगदान लगभग 14.70 प्रतिशत है, जो इसकी आर्थिक महत्ता को दर्शाता है।मुख्यमंत्री ने यह भी दोहराया कि किसान-केंद्रित नीतियां और नवाचार आधारित पहलें भविष्य में भी जारी रहेंगी, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और किसानों की आय में निरंतर वृद्धि सुनिश्चित होगी।