Summer express, मोरनी | मोरनी हिल्स क्षेत्र में सर्वे और सीमांकन कार्य को लेकर हरियाणा सरकार के दावों पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में सवाल खड़े हो गए हैं। सुनवाई के दौरान सरकार ने दावा किया कि 16 अप्रैल से पहले ही सर्वे का काम शुरू कर दिया गया था और करीब 45 एकड़ क्षेत्र में यह प्रक्रिया पूरी भी कर ली गई है।
सरकार की ओर से यह भी बताया गया कि टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और संबंधित कार्य एक कंपनी को सौंप दिया गया है, जिसे निर्धारित समय के भीतर काम शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासनिक और तकनीकी तैयारियां भी पहले से पूरी होने की बात कही गई।
हालांकि, याचिकाकर्ता पक्ष ने इन दावों को चुनौती देते हुए कहा कि जमीनी हकीकत इससे अलग है। उनके अनुसार, सर्वे कार्य अभी तक प्रभावी रूप से शुरू नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि भले ही 20 पटवारियों की तैनाती की गई हो, लेकिन उनके पास पर्याप्त अनुभव नहीं है और जरूरी दस्तावेजों की भी कमी बनी हुई है। इसके अलावा, नायब तहसीलदार के चुनाव ड्यूटी में होने और बजट संबंधी दिक्कतों के चलते काम प्रभावित हो रहा है।
अदालत ने दोनों पक्षों के दावों में विरोधाभास को गंभीरता से लेते हुए कहा कि सरकार के दावे की सत्यता की जांच जरूरी है। कोर्ट ने संबंधित अधिकारी द्वारा दायर हलफनामे को रिकॉर्ड पर लेते हुए उसे देरी से प्रस्तुत करने पर 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।
हाईकोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि अगली सुनवाई में स्पष्ट किया जाए कि सरकार द्वारा बताए गए तथ्यों में कितनी सच्चाई है। मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी। अदालत पहले ही मोरनी हिल्स क्षेत्र को संरक्षित वन घोषित करने और गैर-वन गतिविधियों पर रोक लगाने के निर्देश दे चुकी है, ऐसे में यह मामला और भी महत्वपूर्ण हो गया है।