इंडोनेशिया में सरकारी स्कूल के नन्हें वैज्ञानिकों के मॉडल ऑटोमेटिक डैम गेट सिस्टम को मिला आउट ऑफ द बॉक्स आइडिया अवार्ड

Chandrika
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Summer Express - इंडोनेशिया में सरकारी स्कूल के नन्हें वैज्ञानिकों के मॉडल ऑटोमेटिक डैम गेट सिस्टम को मिला आउट ऑफ द बॉक्स आइडिया अवार्ड

Summer express/मंडी/धर्मवीर -:अक्सर हम देखते हैं कि बरसात के दौरान नदियों पर बने बांध के गेट गाद व मिट्टी भरने से बंद हो जाते है, जिससे बांध गिरने का भी खतरा बढ़ जाता है। पिछले कुछ सालों से हिमाचल में बढ़ती प्राकृतिक आपदाओं और इस समस्या ध्यान में रखते हुए सरकारी स्कूल के दो नन्हें वैज्ञानिकों ने बांध से फ्लड  को ऑटोमेटिक तरीके से बाहर निकालने के लिए ऑटोमेटिक डैम गेटों पर आधारित एक मॉडल तैयार किया है। नन्हें वैज्ञानिकों के इस मॉडल को भारत ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय पर भी ख्याति मिल रही है। 

नन्हें वैज्ञानिकों द्वारा तैयार इस मॉडल को अंतरराष्ट्रीय मॉडल प्रदर्शनी कोडेवर 7.0 में आउट ऑफ द बॉक्स आइडिया अर्वाड से सम्मानित किया गया है। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिला के बीजे राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला मंडी के शिवांग कश्यप और ऋषभ ठाकुर ने समग्र शिक्षा अभियान के तहत इस मॉडल को तैयार किया है। इनका यह मॉडल पहले शिमला व इसके उपरांत बेंगलुरु में भी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में अपनी पहचान बना चुका है। इसके बाद ही शिवांग कश्यप और ऋषभ को इंडोनेशिया के जकार्ता में बीती 16-17 संपन्न हुई प्रदर्शनी में भारत का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला। मॉडल के बारे में जानकारी देते हुए नन्हें वैज्ञानिक शिवांग कश्यप ने बताया कि भारत में बने सभी बांधों के गेट अभी तक मैन्युअल मोड में कार्य कर रहे हैं। लेकिन उनके मॉडल पर आधारित यह गेट पूरी तरह से ऑटोमेटिक हैं। जिसमें उन्होंने पानी के बहाव को मापने के लिए अल्ट्रासोनिक सेंसर, बारिश के लिए रेन सेंसर का इस्तेमाल किया है। टेम्परेचर और ह्यूमिडिटी के लिए डीएचटी का प्रयोग किया है। गेट का मुख्य नियंत्रण क्वारिकी से किया जा रहा है। साथ ही ऑटोमेटिक तरीके से इसकी निगरानी के लिए एडाफ्रूट आयोमेक डैशबोर्ड का भी इस्तेमाल किया गया है। 

नन्हें वैज्ञानिकों की इस उपलब्धि पर स्कूल अध्यापक और एसएमसी सदस्य भी गदगद नजर आए। बुधवार को इस उपलब्धि के साथ स्कूल पहुंचने पर स्कूल प्रधानाचार्य, एसएमसी सदस्यों सहित अध्यापक वर्ग ने ऋषभ और शिवांग का फूल मालाओं के साथ स्वागत किया। इस मौके पर नन्हें वैज्ञानिकों के परिजन भी मौजूद रहे। स्कूल प्रधानार्चा अशोक ठाकुर गौरभान्वित होते हुए कहा कि उन्हें खुशी है उनके स्कूल के दोनों बच्चों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बीजे स्कूल का नाम रोशन किया। वहीं इस अवसर पर एसमसी प्रधान लेखराज ने भी नन्हें वैज्ञानिकों की इस उड़ान की खूब सराहना की और अन्य बच्चों को भी आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।छात्रों का दावा है कि उनके द्वारा बनाया गया यह मॉडल बहुत ही कम कीमत पर बनकर तैयार होगा। आने वाली चुनौतियों को पार करते हुए नन्हें वैज्ञानिकों द्वारा तैयार यह मॉडल यदि मानकों पर खरा उतरता है तो भविष्य में बाढ़ और आपदा के दौरान यह गेट सिस्टम कारगर साबित हो सकता है।

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