महेंद्रगढ़ में अटल भूजल योजना बंद, जल संरक्षण प्रयासों पर असर

Karuna
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Summer express, नारनौल। महेंद्रगढ़ जिले में भूजल स्तर सुधारने के उद्देश्य से चलाई जा रही अटल भूजल योजना के बंद होने से जल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण के प्रयासों को बड़ा झटका लगा है। पूरा महेंद्रगढ़ जिला डार्क जोन में शामिल होने के कारण यह योजना क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही थी। योजना के तहत जिले में जल संरक्षण और भूजल स्तर सुधार के लिए करोड़ों रुपये की परियोजनाएं संचालित की गई थीं।

जानकारी के अनुसार अटल भूजल योजना के अंतर्गत जिले में करीब 100 करोड़ रुपये की लागत से 25 बड़े जलाशयों का निर्माण कराया गया था। प्रत्येक जलाशय लगभग चार-चार एकड़ क्षेत्र में विकसित किया गया, जिससे वर्षा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण को बढ़ावा मिला। इसके अलावा महेंद्रगढ़ और सतनाली क्षेत्र में भी जलस्तर सुधार से जुड़ी विभिन्न परियोजनाओं पर बड़ी राशि खर्च की गई।

हालांकि यह योजना वर्ष 2020-21 में पांच वर्षों के लिए शुरू की गई थी और इसका कार्यकाल मार्च 2026 तक निर्धारित था, लेकिन नवंबर 2025 में ही इसे बंद कर दिया गया। इसके चलते भूजल संरक्षण से जुड़े कई कार्य प्रभावित हो गए हैं।

सूत्रों के अनुसार योजना के दौरान अनियमितताओं और वित्तीय गड़बड़ियों के आरोप भी सामने आए थे। वर्ष 2024 में सीएम फ्लाइंग की जांच में महेंद्रगढ़, भिवानी और चरखी दादरी जिलों में करोड़ों रुपये की कथित हेराफेरी उजागर हुई थी। जांच में जागरूकता शिविरों के नाम पर फर्जी दस्तावेज और तस्वीरें लगाकर सरकारी धन के दुरुपयोग की बात सामने आई थी।

अटल भूजल योजना के तहत हरियाणा के 14 जिलों, 36 ब्लॉकों और 1,647 गांवों को शामिल किया गया था। योजना के लिए 617 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य भूजल स्तर में सुधार लाना और जल संकट से जूझ रहे क्षेत्रों में जल संसाधनों का संरक्षण करना था।

महेंद्रगढ़ जिले में नांगल चौधरी और निजामपुर ब्लॉक सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में शामिल हैं, जहां भूजल स्तर काफी नीचे पहुंच चुका है। इसी कारण इन क्षेत्रों में जल संचयन को बढ़ावा देने के लिए बड़े जलाशयों का निर्माण कराया गया था।

इसके अलावा जिले में भूजल पुनर्भरण और जल संरक्षण परियोजनाओं पर करीब 100 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च की गई। महेंद्रगढ़ डिस्ट्रीब्यूटरी की क्षमता बढ़ाने, दोहान नदी क्षेत्र में बड़े जोहड़ों के निर्माण तथा विभिन्न गांवों में भूजल स्तर सुधार से जुड़ी योजनाओं पर भी करोड़ों रुपये निवेश किए गए।

योजना बंद होने के बाद इसके तहत नियुक्त कर्मचारियों को भी वापस बुला लिया गया है और नवंबर 2025 के बाद से जिले को कोई नया बजट जारी नहीं किया गया है। हालांकि यह चर्चा जरूर है कि केंद्र सरकार ने योजना की अवधि 2027 तक बढ़ाने पर विचार किया है, लेकिन अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

सिंचाई विभाग के एक्सईएन संदीप नसीर का कहना है कि अटल भूजल योजना के तहत जिले में प्रभावी कार्य हुए हैं और इसके सकारात्मक परिणाम भूजल स्तर में सुधार के रूप में दिखाई देने लगे थे। उन्होंने उम्मीद जताई कि विश्व बैंक या अन्य स्रोतों से अनुदान मिलने के बाद भूजल संरक्षण और पुनर्भरण से जुड़े कार्यों को दोबारा गति मिल सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि डार्क जोन में शामिल महेंद्रगढ़ जैसे जिलों के लिए ऐसी योजनाओं का निरंतर संचालन जरूरी है, ताकि भविष्य में जल संकट की गंभीर स्थिति से बचा जा सके।

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