हिसार | देश के 53वें मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने हाल ही में शपथ ग्रहण किया। जस्टिस सूर्यकांत का पैतृक गांव पेटवाड़ (हिसार) में उनका स्वागत रामलला की तरह करने की तैयारी की जा रही है। उनके आगमन के अवसर पर पूरे गांव में दीवाली जैसा उत्सव मनाया जाएगा।
गांव के लोग बताते हैं कि जस्टिस सूर्यकांत का अपने गांव से गहरा नाता है। हर साल वह यहां आकर युवाओं को प्रेरित करते हैं और उनकी प्रगति में मार्गदर्शन करते हैं। ग्रामीणों ने बताया कि पिछले वर्षों में उन्होंने नारनौंद में कोर्ट बनाने की मांग की थी, और अब जनवरी 2026 से इस पर काम शुरू होगा।
शपथ ग्रहण समारोह में जस्टिस सूर्यकांत के बड़े भाई मास्टर ऋषिकांत और परिवार के अन्य सदस्य दिल्ली से शामिल हुए। गांव की सरपंच उर्मिला ने कहा कि इतनी बड़ी खुशी गांव को पहले कभी नहीं मिली। विधायक जस्सी पेटवाड़ ने भी जस्टिस सूर्यकांत की उपलब्धियों को युवा प्रेरणा का उदाहरण बताया।
जस्टिस सूर्यकांत का जन्म 10 फरवरी 1962 को मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ। उनके पिता मदन लाल शास्त्री अध्यापक और साहित्यकार थे, जिन्हें हरियाणा साहित्य अकादमी से सूरदास पुरस्कार और पंडित लक्ष्मीचंद पुरस्कार मिल चुका है। उनकी प्रमुख पुस्तकें ‘नगरी नगरी द्वारे द्वारे’, ‘कमल और कीचड़’, ‘माटी की महक’ और ‘यह कैसा हिंदुस्तान है’ हैं।
जस्टिस सूर्यकांत ने प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा गांव के सरकारी स्कूल से पूरी की। 1981 में राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, हिसार से स्नातक की डिग्री प्राप्त की और 1984 में महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक से विधि स्नातक की उपाधि ली। उन्होंने 1984 में हिसार जिला न्यायालय में वकालत शुरू की और 1985 में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय, चंडीगढ़ में पेशा जारी रखा।
उन्होंने 2000 में हरियाणा के सबसे युवा महाधिवक्ता बनने का गौरव प्राप्त किया। 2004 में पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के स्थायी न्यायाधीश बने। 2018-2019 में हिमाचल प्रदेश के मुख्य न्यायाधीश रहे और 24 मई 2019 को सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश बने। जस्टिस सूर्यकांत के आगमन से गांव के लोग और पूरे क्षेत्र में खुशी और गर्व की लहर दौड़ गई है।