हमीरपुर,अरविंद-:जिले में सामने आए अवैध खनन मामले को लेकर राजनीतिक माहौल गर्मा गया है। जिला कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष सुमन भारती शर्मा ने प्रेस वार्ता के दौरान भाजपा नेताओं पर जांच को प्रभावित करने की कोशिश करने के गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि इस मामले में कानून से ऊपर कोई नहीं है और दोषियों के खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई होनी चाहिए।
पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में सुमन भारती ने कहा कि अवैध खनन के आरोपियों और उनसे जुड़े कुछ राजनीतिक लोगों द्वारा पूरे मामले को राजनीतिक रंग देने की कोशिश की जा रही है। उनका कहना था कि यह प्रयास असल मुद्दे से ध्यान भटकाने के लिए किया जा रहा है, जबकि सच्चाई यह है कि जांच एजेंसियों के पास पर्याप्त सबूत मौजूद हैं।
उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि 12 अगस्त 2025 को हुई छापेमारी के दौरान मौके पर ताजा खनन सामग्री पाई गई थी। वहां मौजूद लोगों ने पुलिस कार्रवाई में सहयोग नहीं किया, जिससे यह संकेत मिलता है कि सरकारी प्रतिबंधों के बावजूद अवैध गतिविधियां जारी थीं। उन्होंने यह भी कहा कि आरोपियों ने राहत पाने के लिए उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया, लेकिन अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उनकी जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं।
सुमन भारती ने भाजपा की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिन लोगों पर आरोप लगे हैं, वे हमीरपुर के एक विधायक के परिजन बताए जा रहे हैं। ऐसे में भाजपा नेताओं का इस मुद्दे पर मौन रहना कई तरह के सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि अगर आरोप निराधार हैं तो पार्टी को खुलकर सामने आना चाहिए, और यदि आरोप सही हैं तो कार्रवाई का समर्थन करना चाहिए।उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले में प्रदेश सरकार की कोई सीधी भूमिका नहीं है, क्योंकि न्यायालय के स्तर पर भी आरोपियों को राहत नहीं मिली है। उनके अनुसार, पुलिस ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही गिरफ्तारी की है और कानून सम्मत प्रक्रिया का पालन किया गया है।
पूर्व विधायक राजेंद्र राणा के थाने पहुंचने को लेकर भी सुमन भारती ने सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि राणा द्वारा कुछ ऐसे लोगों के साथ थाने जाना, जिन पर पहले से कानूनी मामले चल रहे हैं, उचित नहीं कहा जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि भीड़ इकट्ठा करके या दबाव बनाकर जांच प्रक्रिया को प्रभावित नहीं किया जा सकता।
सुमन भारती ने अपने बयान में राजेंद्र राणा की राजनीतिक शैली पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि वे अक्सर “मित्रों की सरकार” की बात करते हैं, लेकिन उनके राजनीतिक संबंधों का इतिहास अलग कहानी बताता है। उन्होंने दावा किया कि राणा ने अपने राजनीतिक जीवन में कई नेताओं के साथ संबंध बनाए लेकिन बाद में उन्हें निराश किया।
प्रेस वार्ता के अंत में उन्होंने दोहराया कि अवैध खनन जैसे गंभीर मामलों में किसी भी तरह की राजनीतिक दखलअंदाजी बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि जांच को निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से पूरा किया जाए, ताकि सच सामने आ सके और दोषियों को सजा मिल सके।