रात में इलाज के लिए 50 किमी सफर को मजबूर लोग
कुल्लू, मनमिंदर-: जिला कुल्लू के उपमंडल बंजार की सैंज घाटी की करीब 15 पंचायतों और लगभग 25 हजार की आबादी को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने वाला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) इन दिनों गंभीर अव्यवस्थाओं से जूझ रहा है। अस्पताल में डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की भारी कमी के कारण मरीजों को समुचित इलाज नहीं मिल पा रहा है। हालात ऐसे हैं कि शाम चार बजे के बाद अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह बंद हो जाती हैं, जबकि रात्रिकालीन आपातकालीन सुविधा आज तक शुरू नहीं हो सकी है। इसके चलते मरीजों को रात के समय इलाज के लिए करीब 50 किलोमीटर दूर क्षेत्रीय अस्पताल ढालपुर का रुख करना पड़ता है।
वर्तमान में अस्पताल में नियमित रूप से नियुक्त दो डॉक्टर अवकाश पर हैं और स्वास्थ्य केंद्र केवल डेपुटेशन पर तैनात एक डॉक्टर के सहारे संचालित हो रहा है। सीमित संसाधनों और स्टाफ की कमी के चलते गंभीर मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद तुरंत कुल्लू रेफर कर दिया जाता है। इससे स्थानीय लोगों को आर्थिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है तथा कई मरीज निजी अस्पतालों में इलाज कराने को मजबूर हैं।
गौरतलब है कि सैंज का यह स्वास्थ्य केंद्र पहले एक डिस्पेंसरी था। वर्ष 2022 में इसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा दिया गया था। इसके साथ ही यहां 50 बिस्तरों वाले अस्पताल के निर्माण और करीब 25 अतिरिक्त पैरामेडिकल कर्मचारियों की नियुक्ति की घोषणा भी की गई थी। हालांकि, वर्षों बाद भी अधिकांश पद खाली पड़े हैं और रात्रिकालीन स्वास्थ्य सेवाएं शुरू नहीं हो सकी हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सरकार और स्वास्थ्य विभाग को कई बार इस समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
सैंज व्यापार मंडल के अध्यक्ष झाबे राम ने कहा कि वर्तमान में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थिति बेहद चिंताजनक है। उन्होंने बताया कि करीब 15 पंचायतों की पूरी आबादी इसी अस्पताल पर निर्भर है, लेकिन यहां न तो पर्याप्त डॉक्टर हैं और न ही रात के समय कोई स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध है। यदि किसी मरीज की तबीयत रात में बिगड़ जाए तो उसे 50 किलोमीटर दूर ढालपुर अस्पताल ले जाना पड़ता है। उन्होंने सरकार से मांग की कि अस्पताल में जल्द नियमित डॉक्टरों की नियुक्ति कर रात्रिकालीन सेवाएं शुरू की जाएं।
देवगढ़ गोही पंचायत के प्रधान दीवान नेगी ने कहा कि वर्तमान में अस्पताल में केवल एक डॉक्टर कार्यरत है, जिसके कारण सामान्य बीमारियों का ही उपचार हो पाता है। गंभीर मरीजों को तुरंत रेफर करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि जब सरकार ने अस्पताल का स्तर बढ़ाया है तो उसी अनुरूप सुविधाएं और स्टाफ भी उपलब्ध कराया जाना चाहिए। उन्होंने रिक्त पड़े पैरामेडिकल पदों को शीघ्र भरने की मांग करते हुए कहा कि इससे सैंज घाटी के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं स्थानीय स्तर पर मिल सकेंगी।
दुशाहड़ पंचायत के प्रधान सुखदयाल राणा ने कहा कि सैंज घाटी में एनएचपीसी सहित कई बड़े जलविद्युत परियोजनाएं संचालित हैं, जिनसे लाडा और सीएसआर के तहत विकास कार्यों के लिए पर्याप्त धनराशि मिलती है। उनका कहना है कि इस राशि का उपयोग मुख्य रूप से ढालपुर अस्पताल के विकास पर किया जा रहा है, जबकि सैंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। उन्होंने प्रशासन और सरकार से मांग की कि लाडा और सीएसआर फंड का एक हिस्सा सैंज अस्पताल के बुनियादी ढांचे, आधुनिक उपकरणों और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार पर भी खर्च किया जाए, ताकि घाटी के लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधा अपने क्षेत्र में ही उपलब्ध हो सके।स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते अस्पताल में डॉक्टरों, नर्सों और अन्य पैरामेडिकल कर्मचारियों की नियुक्ति नहीं की गई और रात्रिकालीन सेवाएं शुरू नहीं हुईं, तो सैंज घाटी की हजारों की आबादी को भविष्य में भी स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ेगी। लोगों ने सरकार से मांग की है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को उसकी घोषित क्षमता के अनुरूप विकसित कर क्षेत्रवासियों को बेहतर और समय पर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं।