समर न्यूज। चंडीगढ़
पंजाब विधानसभा के मानसून सत्र में बेअदबी के मामलों से जुड़े कानून में संशोधन को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए। वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने सदन में कहा कि सरकार श्री अकाल तख्त साहिब के निर्देशों और सिख समुदाय की भावनाओं का सम्मान करते हुए आगे की कार्रवाई करेगी।
उन्होंने कहा कि धार्मिक मामलों से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर सरकार किसी जल्दबाजी में फैसला नहीं लेगी और सभी पहलुओं को ध्यान में रखा जाएगा। चीमा के बयान के बाद कांग्रेस विधायकों ने विधानसभा में जमकर नारेबाजी की। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि सदन में उनकी आवाज दबाने की कोशिश की गई और कुछ विधायकों के साथ धक्का-मुक्की हुई।
विपक्षी विधायकों ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ बताया। वहीं, विधानसभा अध्यक्ष ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि यदि कोई शिकायत आती है तो इसकी जांच करवाई जाएगी और तथ्यों के आधार पर कार्रवाई होगी।
बेअदबी रोकने के कानून पर सरकार का रुख
पंजाब सरकार ने पहले भी बेअदबी के मामलों में सख्त कानून बनाने की बात कही है। सरकार का कहना है कि धार्मिक ग्रंथों की बेअदबी करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जरूरी है। हालांकि, इस मुद्दे पर सिख धार्मिक संस्थाओं, राजनीतिक दलों और विभिन्न संगठनों के बीच अलग-अलग राय सामने आती रही है। श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से बेअदबी मामलों में सख्त कदम उठाने और कानून में बदलाव को लेकर सुझाव दिए गए हैं। सरकार का कहना है कि वह इन निर्देशों को गंभीरता से ले रही है।
कांग्रेस का सरकार पर हमला
पंजाब सरकार ने पहले भी बेअदबी के मामलों में सख्त कानून बनाने की बात कही है। सरकार का कहना है कि धार्मिक ग्रंथों की बेअदबी करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जरूरी है। हालांकि, इस मुद्दे पर सिख धार्मिक संस्थाओं, राजनीतिक दलों और विभिन्न संगठनों के बीच अलग-अलग राय सामने आती रही है। श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से बेअदबी मामलों में सख्त कदम उठाने और कानून में बदलाव को लेकर सुझाव दिए गए हैं। सरकार का कहना है कि वह इन निर्देशों को गंभीरता से ले रही है।
गनीव मजीठिया ने भी उठाए सवाल
शिरोमणि अकाली दल की विधायक गनीव मजीठिया ने भी विधानसभा में सरकार को घेरा। उन्होंने आम आदमी पार्टी पर निशाना साधते हुए पूछा कि सरकार को सलाह देने वाला उसका गुप्त सलाहकार कौन है। उन्होंने कहा कि क्या सरकार धार्मिक संस्थाओं और गुरु की मर्यादा से टकराव की स्थिति पैदा करना चाहती है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार को धार्मिक और सामाजिक मुद्दों पर पारदर्शिता बरतनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पंजाब के लोगों की भावनाओं से जुड़े मामलों में राजनीतिक लाभ के बजाय गंभीरता से काम करने की जरूरत है।
विधानसभा में बढ़ा तनाव
सत्र के दौरान विपक्षी हंगामे के कारण कई बार माहौल तनावपूर्ण रहा। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। विधानसभा अध्यक्ष ने सभी सदस्यों से सदन की गरिमा बनाए रखने की अपील की। बेअदबी कानून में संशोधन का मुद्दा आने वाले दिनों में भी पंजाब की राजनीति का प्रमुख विषय बना रह सकता है। सरकार जहां अकाल तख्त के निर्देशों के अनुसार आगे बढ़ने की बात कह रही है, वहीं विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की तैयारी में है।