एजेंसी | वॉशिंगटन
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जन्म के आधार पर नागरिकता (बर्थराइट सिटीजनशिप) और तथाकथित ‘बर्थ टूरिज्म’ को लेकर दो नए कार्यकारी आदेश जारी किए हैं। व्हाइट हाउस का कहना है कि इन कदमों का उद्देश्य अमेरिकी नागरिकता कानूनों के कथित दुरुपयोग को रोकना है।
ट्रंप ने कहा कि बर्थराइट सिटीजनशिप व्यवस्था का लंबे समय से गलत फायदा उठाया जा रहा था और इसे “मजाक” बना दिया गया था। नए आदेशों के तहत उन मामलों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी, जिनमें विदेशी नागरिक केवल बच्चे को अमेरिका में जन्म दिलाने के उद्देश्य से पर्यटक वीजा का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे मामलों में वीजा जारी करने और प्रवेश प्रक्रिया को और सख्त बनाने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही कुछ विशेष श्रेणियों में अमेरिका में जन्म लेने वाले बच्चों को स्वत: नागरिकता देने के प्रावधान को सीमित करने की कोशिश की गई है। हालांकि अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन और हालिया सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के कारण इन आदेशों के कानूनी भविष्य पर सवाल उठ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन पर अदालत में चुनौती लगभग तय है। उधर, ट्रंप प्रशासन की सख्त आव्रजन नीतियों का असर विदेशी छात्रों पर भी दिखाई देने लगा है।
हाल के आंकड़ों और शिक्षा क्षेत्र के विश्लेषणों के अनुसार भारतीय छात्रों के अमेरिका जाने की रफ्तार धीमी हुई है। वीजा जांच, दस्तावेज सत्यापन और आव्रजन नियमों में सख्ती के कारण कई छात्र अन्य देशों की ओर भी रुख कर रहे हैं। इसी बीच कुछ श्रेणियों में पाकिस्तान और बांग्लादेश के छात्रों को अपेक्षाकृत अधिक वीजा मिलने की चर्चा भी सामने आई है, हालांकि अमेरिकी प्रशासन ने इस संबंध में किसी विशेष देश के पक्ष में नीति होने की पुष्टि नहीं की है।
अनिवासियों की संख्या में गिरावट
आव्रजन विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका में पिछले कई दशकों में पहली बार स्थायी और अस्थायी अनिवासियों की संख्या में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की जा रही है। इसके पीछे कड़ी वीजा जांच, सीमा सुरक्षा और आव्रजन नियमों में बदलाव को प्रमुख कारण माना जा रहा है। ट्रंप प्रशासन का दावा है कि इन कदमों से राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत होगी और आव्रजन प्रणाली अधिक पारदर्शी बनेगी, जबकि आलोचकों का कहना है कि इससे वैध आव्रजन, शिक्षा और वैश्विक प्रतिभाओं के अमेरिका आने पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
कानूनी लड़ाई तेज होने के आसार
संवैधानिक विशेषज्ञों का मानना है कि नए आदेशों की वैधता पर जल्द ही संघीय अदालतों में सुनवाई शुरू हो सकती है। उनका कहना है कि जन्म से नागरिकता का अधिकार अमेरिकी संविधान से जुड़ा विषय है, इसलिए अंतिम निर्णय न्यायपालिका के हाथ में होगा। शिक्षा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि अमेरिकी वीजा प्रक्रिया में बढ़ी सख्ती का असर भारतीय छात्रों और पेशेवरों पर भी पड़ सकता है। ऐसे में आवेदकों को दस्तावेजों, वीजा नियमों और यात्रा संबंधी शर्तों का पहले से अधिक सावधानी के साथ पालन करने की सलाह दी जा रही है।