Summer express/शिमला संजू-:हिमाचल प्रदेश में लंबित वित्तीय देनदारियों को लेकर पेंशनर्स का आंदोलन अब तेज होने जा रहा है। मुख्यमंत्री की ओर से संशोधित वेतनमान के एरियर को लेकर की गई घोषणा के बाद पेंशनर्स के एक गुट ने सरकार के खिलाफ आंदोलन को निर्णायक दिशा देने का ऐलान किया है। हिमाचल प्रदेश पेंशनर्स संयुक्त संघर्ष समिति ने सरकार को 15 दिन का समय देते हुए वार्ता के लिए बुलाने की मांग की है। समिति ने साफ किया है कि आंदोलन गांधीवादी तरीके से ही चलाया जाएगा, लेकिन मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो प्रदेशव्यापी आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
हिमाचल प्रदेश पेंशनर्स संयुक्त संघर्ष समिति के वरिष्ठ पदाधिकारियों भूपराम, गंगाराम और सेनराम नेगी ने प्रेस बयान जारी कर आंदोलन की रूपरेखा सामने रखी। समिति के मुताबिक मंगलवार से 12 नवंबर तक प्रदेशभर में जनजागरण अभियान चलाया जाएगा। पेंशनर नेता हाथों में लाठी लेकर किन्नौर से लाहौल-स्पीति तक गांव-गांव पहुंचकर अपनी मांगों के समर्थन में लोगों को जागरूक करेंगे।समिति ने दो अक्टूबर को ठियोग में लाठी लेकर एकत्रित होकर आंदोलन को आगे बढ़ाने का संकल्प लेने की बात कही है। वहीं, शीतकालीन विधानसभा सत्र के दौरान विधानसभा घेराव और 10-10 पेंशनरों के क्रमिक धरने की चेतावनी भी दी गई है।पेंशनर नेताओं ने मुख्यमंत्री के साथ हुई हालिया बैठक को लेकर भी सवाल उठाए। उनका दावा है कि करीब 1.90 लाख पेंशनरों की मांगों का प्रतिनिधित्व कुछ चुनिंदा लोगों के माध्यम से नहीं किया जा सकता। समिति ने दावा किया कि 18 पेंशनर संगठन और बड़ी संख्या में पेंशनर्स उनके आंदोलन के साथ हैं।
संघर्ष समिति ने 1 जनवरी 2016 से 31 जनवरी 2022 के बीच सेवानिवृत्त कर्मचारियों और पारिवारिक पेंशनरों के लंबित वित्तीय लाभों के भुगतान की मांग की है। इसके अलावा डीए की लंबित किस्तें, ग्रेच्युटी और कम्यूटेशन के एरियर जारी करने की मांग भी उठाई गई है।पेंशनर नेताओं ने कहा कि लंबे समय से चल रहे संघर्ष के दौरान कई पेंशनरों का निधन हो चुका है। उन्होंने आरडीजी सुविधा बंद किए जाने और पेंशनरों को अलग-अलग वर्गों में बांटे जाने पर भी सवाल उठाते हुए सरकार से सभी लंबित मांगों पर जल्द निर्णय लेने की अपील की।