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इटली में सिख समुदाय ने जिंदा रखी विश्व युद्धों में शहीद सैनिकों की याद

समर न्यूज | चंडीगढ़

इटली की धरती पर विश्व युद्धों के दौरान जान गंवाने वाले सिख सैनिकों की स्मृति को वहां रह रहा सिख समुदाय लगातार जीवित रखे हुए है। करीब एक दशक से इटली में सक्रिय सिख समुदाय से जुड़े संगठन युद्धस्थलों, कब्रिस्तानों और स्मारकों तक पहुंचकर उन सैनिकों की पहचान और उनकी कहानियां सामने लाने का काम कर रहे हैं, जिनका योगदान लंबे समय तक व्यापक ब्रिटिश-भारतीय सैन्य इतिहास में दबा रहा।
हाल के वर्षों में इस प्रयास में इटली के स्थानीय प्रशासन और नागरिकों की भागीदारी भी बढ़ी है। इटली में यह स्मरण केवल धार्मिक या सामुदायिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं है। सिख संगठन युद्ध कब्रिस्तानों में श्रद्धांजलि, अरदास और पुष्पांजलि के कार्यक्रम आयोजित करते हैं। इनमें स्थानीय जनप्रतिनिधियों, रक्षा अधिकारियों और आम इतालवी नागरिकों को भी शामिल किया जाता है। इस पहल का उद्देश्य नई पीढ़ी को यह बताना है कि आजादी और फासीवाद के खिलाफ संघर्ष में भारतीय सैनिकों ने किस कीमत पर योगदान दिया था।
फोर्ली का युद्ध कब्रिस्तान सिख सैनिकों की स्मृति का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है। यहां द्वितीय विश्व युद्ध में मारे गए भारतीय सैनिकों की कब्रें हैं और सिख सैनिकों को समर्पित स्मृति स्थल भी बनाया गया है। समुदाय से जुड़े लोग हर वर्ष यहां श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित करते हैं। हाल में एक स्मृति कार्यक्रम में फोर्ली के मेयर के साथ 20 अन्य नगरों के मेयर व स्थानीय प्रशासन से जुड़े अधिकारी शामिल हुए।
भारतीय राजनयिक प्रतिनिधियों ने भी सैनिकों को श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम में अलग-अलग शहरों के गुरुद्वारों से सिख समुदाय के लोग श्री गुरु ग्रंथ साहिब को साथ लेकर पहुंचे। अरदास के बाद पुष्पांजलि दी गई और लंगर की व्यवस्था की गई। आयोजन में इस बात पर जोर रहा कि जिन सैनिकों ने इटली की मुक्ति के लिए अपने प्राण न्योछावर किए, उनकी स्मृति केवल सिख समुदाय की नहीं, बल्कि इटली के इतिहास का भी हिस्सा है।

इतिहास को स्थानीय समाज तक पहुंचाने की कोशिश
इटली में सिख संगठनों का प्रयास अब केवल स्मारकों पर कार्यक्रम आयोजित करने तक सीमित नहीं है। वे स्थानीय लोगों और विशेषकर युवाओं के बीच भारतीय सैनिकों की भूमिका के बारे में जागरूकता बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। आयोजकों का मानना है कि इतिहास को केवल किताबों और सैन्य अभिलेखों में रखने के बजाय उन स्थानों से जोड़ना जरूरी है जहां सैनिकों ने लड़ाई लड़ी और जान गंवाई। इसी वजह से स्मृति कार्यक्रमों में स्थानीय मेयरों और प्रशासनिक अधिकारियों की भागीदारी को विशेष महत्व दिया जा रहा है। इससे सिख सैनिकों की कहानी इतालवी समाज के व्यापक हिस्से तक पहुंच रही है। शोध में भी यह सामने आया है कि भारतीय सैनिकों का इटली की मुक्ति में योगदान लंबे समय तक वहां की सामूहिक ऐतिहासिक स्मृति में अपेक्षाकृत कम दिखाई दिया। इटली में सिख संगठनों का प्रयास अब केवल स्मारकों पर कार्यक्रम आयोजित करने तक सीमित नहीं है। वे स्थानीय लोगों और विशेषकर युवाओं के बीच भारतीय सैनिकों की भूमिका के बारे में जागरूकता बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। आयोजकों का मानना है कि इतिहास को केवल किताबों और सैन्य अभिलेखों में रखने के बजाय उन स्थानों से जोड़ना जरूरी है जहां सैनिकों ने लड़ाई लड़ी और जान गंवाई। इसी वजह से स्मृति कार्यक्रमों में स्थानीय मेयरों और प्रशासनिक अधिकारियों की भागीदारी को विशेष महत्व दिया जा रहा है। इससे सिख सैनिकों की कहानी इतालवी समाज के व्यापक हिस्से तक पहुंच रही है। शोध में भी यह सामने आया है कि भारतीय सैनिकों का इटली की मुक्ति में योगदान लंबे समय तक वहां की सामूहिक ऐतिहासिक स्मृति में अपेक्षाकृत कम दिखाई दिया।

मोंटे कैसिनो की लड़ाई में भूमिका
द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश भारतीय सेना की कई टुकड़ियों को इटली भेजा गया था। भारतीय डिवीजनों ने इटली के अभियान में महत्वपूर्ण लड़ाइयों में हिस्सा लिया, जिनमें 1944 की मोंटे कैसिनो की लड़ाई भी शामिल थी। कठिन पहाड़ी इलाके और भारी जर्मन प्रतिरोध के बीच भारतीय सैनिकों ने मित्र राष्ट्रों की कार्रवाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मोंटे कैसिनो आज भी भारतीय सैनिकों की शहादत की याद दिलाने वाला प्रमुख स्थल है। वहां भारतीय सेना के शहीद सैनिकों की स्मृति में स्थापित स्मारक इस इतिहास को सामने लाता है। इटली में सिख समुदाय के लिए ऐसे स्थान केवल युद्ध इतिहास के केंद्र नहीं हैं, बल्कि अपनी सैन्य विरासत और पूर्वजों के बलिदान से जुड़ने के माध्यम भी हैं।

साझा इतिहास का संदेश
इटली में सिख समुदाय की यह पहल अब भारत और इटली के साझा युद्ध इतिहास को याद करने का माध्यम बन रही है। सैनिक उस समय ब्रिटिश भारतीय सेना का हिस्सा थे, लेकिन उनके बलिदान का संबंध उस संघर्ष से भी था जिसमें इटली को नाजी जर्मनी के नियंत्रण से मुक्त कराने के लिए मित्र राष्ट्रों ने अभियान चलाया था। इसलिए इन सैनिकों को याद करना औपनिवेशिक इतिहास की जटिलताओं को समझने के साथ-साथ उनके व्यक्तिगत साहस और बलिदान को सम्मान देने का भी अवसर है।

अगली पीढ़ी तक पहुंच रही विरासत
समुदाय की कोशिश है कि सिख सैनिकों की यह विरासत केवल वार्षिक श्रद्धांजलि कार्यक्रमों तक सीमित न रहे। स्थानीय इतालवी समाज, सिख युवाओं और आने वाली पीढ़ियों को इस इतिहास से जोड़कर स्मारकों और कब्रिस्तानों को जीवंत ऐतिहासिक स्थलों के रूप में देखा जाए। इसी प्रयास के कारण इटली में सिख सैनिकों की स्मृति अब धीरे-धीरे सामुदायिक दायरे से बाहर निकलकर स्थानीय सार्वजनिक स्मृति का हिस्सा बन रही है।

स्मारकों से आगे बढ़ती पहल
सिख समुदाय से जुड़े कार्यकर्ताओं का कहना है कि सैनिकों की कब्रों और स्मारकों की देखभाल के साथ उनके नाम, रेजिमेंट और युद्ध की परिस्थितियों से जुड़ी जानकारी को भी सुरक्षित रखना जरूरी है। इसके लिए इटली के अलग-अलग युद्ध कब्रिस्तानों और युद्धस्थलों की यात्राएं की जा रही हैं। फोर्ली, मोंटे कैसिनो और अन्य स्थानों पर जाकर सैनिकों की कहानियों को संकलित करने का काम जारी है।

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