Summer express/शिमला, संजू- इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) शिमला में उपचार और ऑपरेशन के बाद भी बच्चे की हालत में सुधार न होने पर परिवार ने अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। मंडी जिले के बल्ह क्षेत्र से जुड़े परिवार ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को मांगपत्र सौंपकर पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच करवाने की मांग की है।
परिजनों का कहना है कि उनका बच्चा पिछले करीब दो वर्षों से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहा है। परिवार ने अलग-अलग अस्पतालों में उसका उपचार करवाया। इसके बाद बच्चे को आईजीएमसी शिमला लाया गया, जहां उसका उपचार किया गया और ऑपरेशन भी हुआ। हालांकि, परिवार के अनुसार ऑपरेशन के बाद भी बच्चे की स्वास्थ्य स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं आया।
परिजनों का आरोप है कि लंबे समय तक उपचार और ऑपरेशन के बावजूद बच्चे की परेशानी बनी हुई है और वह सामान्य जीवन जीने में सक्षम नहीं है। इसी को लेकर परिवार ने उपचार की प्रक्रिया और ऑपरेशन में कथित लापरवाही की आशंका जताते हुए सरकार से मामले की गहन जांच की मांग की है।मुख्यमंत्री को सौंपे गए मांगपत्र में परिवार ने कहा है कि जांच किसी स्वतंत्र एवं विशेषज्ञ उच्चस्तरीय समिति से करवाई जाए, ताकि उपचार के दौरान हुई पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष समीक्षा हो सके। यदि जांच में किसी चिकित्सक या अन्य जिम्मेदार व्यक्ति की लापरवाही सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।परिवार ने सरकार से बच्चे के आगे के उपचार के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध करवाने की भी मांग की है। बच्चे की मां ममता और उसके दादा का कहना है कि परिवार लंबे समय से इलाज पर खर्च कर रहा है और अब आर्थिक स्थिति भी प्रभावित हो रही है।फिलहाल आईजीएमसी प्रशासन या स्वास्थ्य विभाग की ओर से आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। परिवार को उम्मीद है कि सरकार मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश देगी और बच्चे को उचित उपचार एवं न्याय दिलाने के लिए आवश्यक कदम उठाएगी।