Summer express/शिमला,संजू-:हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में सोमवार सुबह नॉन-वेंडिंग जोन को लेकर उस समय विवाद की स्थिति पैदा हो गई, जब कुछ तहबाजारियों ने प्रतिबंधित क्षेत्र में दुकानें सजा दीं। सूचना मिलने के बाद नगर निगम शिमला की टीम मौके पर पहुंची और तहबाजारियों को वहां से हटाने का प्रयास किया। इस दौरान निगम कर्मचारियों और कारोबारियों के बीच काफी देर तक तीखी बहस होती रही। तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए पुलिस बल भी मौके पर बुलाया गया ।तहबाजारियों के नॉन-वेंडिंग जोन में दुकानें लगाने के बाद नगर निगम की कार्रवाई को लेकर दोनों पक्षों में विवाद बढ़ गया। निगम कर्मचारियों ने कारोबारियों से क्षेत्र खाली करने को कहा, जबकि तहबाजारियों ने इसका विरोध किया। उनका कहना था कि उन्हें बार-बार हटाया जा रहा है, लेकिन उनके रोजगार और रोजी-रोटी का स्थायी समाधान नहीं किया जा रहा।
कारोबारियों ने नॉन-वेंडिंग जोन घोषित किए गए क्षेत्र को लेकर भी सवाल उठाए। तहबाजारियों का कहना है कि जिस स्थान को पहले सिंकिंग जोन बताते हुए कारोबार के लिए प्रतिबंधित किया गया था, उसी जगह पर अब भारी वाहनों की पार्किंग की जा रही है। उनका सवाल है कि यदि यह क्षेत्र आम कारोबारियों और रेहड़ी-फड़ी वालों के लिए असुरक्षित अथवा प्रतिबंधित है, तो फिर यहां बड़े और भारी वाहनों को खड़ा करने की अनुमति किस आधार पर दी जा रही है।तहबाजारियों ने आरोप लगाया कि नियमों का इस्तेमाल केवल छोटे कारोबारियों के खिलाफ किया जा रहा है। उनका कहना है कि वे कई वर्षों से छोटे स्तर पर कारोबार कर अपने परिवारों का पालन-पोषण कर रहे हैं। ऐसे में अचानक उन्हें हटाने से उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो जाएगा।कारोबारियों ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि उन्हें उजाड़ने के बजाय व्यवस्थित तरीके से बसाने की योजना तैयार की जाए। उनका कहना है कि सरकार को रेहड़ी-फड़ी और तहबाजारी करने वाले लोगों के लिए उपयुक्त स्थान उपलब्ध करवाना चाहिए, ताकि यातायात व्यवस्था और शहर की सुंदरता के साथ-साथ गरीब परिवारों की आजीविका भी सुरक्षित रह सके।
तहबाजारियों ने आरोप लगाया कि उन्हें रोजगार से हटाने की कार्रवाई गरीब वर्ग के हित में नहीं है। उन्होंने सरकार से स्पष्ट नीति बनाने की मांग की है, जिससे शहर में वेंडिंग व्यवस्था को व्यवस्थित किया जा सके और कारोबारियों को बार-बार कार्रवाई का सामना न करना पड़े।फिलहाल मौके पर नगर निगम के कर्मचारी और पुलिस जवान तैनात रहे। प्रशासन की ओर से स्थिति पर नजर रखी जा रही है, जबकि तहबाजारियों और निगम के बीच विवाद को शांत कराने के प्रयास भी किए गए।