Summer express/मंडी, धर्मवीर-:वाहन की पासिंग के लिए अब केवल कागजों और बाहरी जांच पर निर्भर रहने का दौर धीरे-धीरे खत्म हो रहा है। केंद्र सरकार की नई व्यवस्था के तहत वाहनों की तकनीकी जांच को अधिक पारदर्शी और सटीक बनाने के लिए ऑटोमेटेड टेस्टिंग सेंटर (ATS) की सुविधा शुरू की जा रही है। मंडी जिला के सुंदरनगर उपमंडल के कांगू में प्रदेश का दूसरा ऑटोमेटेड टेस्टिंग सेंटर स्थापित हो चुका है।इस सेंटर में वाहनों की जांच पूरी तरह कंप्यूटराइज्ड तरीके से की जा रही है। आरटीओ मंडी नवीन शर्मा के अनुसार फिलहाल सुंदरनगर उपमंडल के अंतर्गत आने वाले वाहनों की पासिंग यहां की जा रही है। इसके अलावा अन्य क्षेत्रों के वाहन मालिक भी अपनी इच्छा से यहां स्लॉट बुक करवाकर वाहन की जांच और पासिंग करवा सकते हैं।
आंखों से नहीं, मशीनों से होगी बारीकी से जांच
एटीएस में वाहन को कई चरणों से गुजरना पड़ता है। प्रारंभिक स्तर पर वाहन की बाहरी स्थिति और तय मानकों के अनुरूप जांच की जाती है। यदि कोई कमी सामने आती है तो उसे दूर करने के निर्देश दिए जाते हैं। इसके बाद वाहन को कंप्यूटराइज्ड टेस्टिंग रैंप पर ले जाया जाता है।यहां आधुनिक मशीनों की मदद से वाहन के विभिन्न तकनीकी हिस्सों की जांच होती है। वाहन के बाहरी हिस्सों के साथ-साथ उसके अंदरूनी और तकनीकी पुर्जों की स्थिति भी जांची जाती है। केंद्र सरकार की ओर से निर्धारित सभी पैरामीटर पर वाहन का परीक्षण किया जाता है।आरटीओ मंडी नवीन शर्मा ने बताया कि जब तक वाहन निर्धारित मानकों पर खरा नहीं उतरता और सिस्टम की ओर से ग्रीन सिग्नल नहीं मिलता, तब तक उसकी पासिंग नहीं हो सकेगी। इससे खराब और तकनीकी रूप से असुरक्षित वाहनों के सड़क पर दौड़ने की संभावना कम होगी।
आरटीओ और एमवीआई कार्यालयों के चक्कर से राहत
एटीएस व्यवस्था का एक बड़ा फायदा यह भी है कि वाहन मालिक अपनी सुविधा के अनुसार स्लॉट बुक करवा सकते हैं। इससे आरटीओ कार्यालय और एमवीआई के चक्कर लगाने की परेशानी कम होगी और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी।
फिलहाल दो जगह शुरू हुई सुविधा
हिमाचल प्रदेश में अभी यह सुविधा कांगड़ा और मंडी जिले में शुरू हुई है। फिलहाल एटीएस से पासिंग करवाना सभी वाहनों के लिए अनिवार्य नहीं है और वाहन मालिक मैनुअल प्रक्रिया के तहत भी पासिंग करवा सकते हैं। हालांकि भविष्य में प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में भी ऐसे सेंटर स्थापित करने की योजना है। इसके बाद वाहनों की फिटनेस जांच को पूरी तरह ऑटोमेटेड सिस्टम से जोड़ने की दिशा में कदम बढ़ाया जाएगा।