बच्चों के सिरप से लेकर हृदय, किडनी और आंखों की दवाएं शामिल
समर न्यूज| शिमला
केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन की अगस्त की दवा गुणवत्ता जांच में पंजाब और हिमाचल प्रदेश में निर्मित 71 दवाओं के नमूने निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे। इनमें हिमाचल प्रदेश की 63 और पंजाब की आठ दवाएं शामिल हैं। देशभर में कुल 221 दवा नमूनों को मानक गुणवत्ता के अनुरूप नहीं पाया गया।
जांच में बच्चों के सिरप, एंटीबायोटिक, बुखार और खांसी की दवाओं के अलावा हृदय, किडनी और आंखों से संबंधित दवाएं, इंजेक्शन और विटामिन उत्पाद भी शामिल हैं। केंद्रीय और राज्य स्तर की प्रयोगशालाओं में इन नमूनों की जांच की गई। हिमाचल में जिन स्थानों पर निर्मित दवाओं के नमूने फेल हुए, उनमें बद्दी, बरोटीवाला, नालागढ़, झाड़माजरी, भुड्ड, दवनी, गुल्लरवाला, कालाअंब, पांवटा साहिब, परवाणू, सोलन और कांगड़ा शामिल हैं। दवा नियामक की ओर से संबंधित कंपनियों के बैच और उत्पादन प्रक्रिया की जांच की जा रही है। दोनों राज्यों में पहले भी दवाइयों के सैंपल फेल होते रहे हैं।
कंपनियों को नोटिस
हिमाचल के राज्य औषधि नियंत्रक के अनुसार, जिन कंपनियों के नमूने जांच में असफल पाए गए, उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। संबंधित बैचों की बिक्री और वितरण रोकने तथा बाजार में उपलब्ध स्टॉक वापस मंगाने की प्रक्रिया शुरू की गई है। कंपनियों से जवाब मांगा गया है और जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की नियामकीय कार्रवाई की जाएगी।
गुणवत्ता जांच जारी
दवा नियामक समय-समय पर बाजार और विनिर्माण इकाइयों से नमूने लेकर उनकी गुणवत्ता की जांच करता है। अगस्त के नमूनों में गुणवत्ता संबंधी कमियां मिलने के बाद संबंधित उत्पादों और निर्माताओं पर निगरानी बढ़ाई गई है। हालांकि किसी नमूने का मानक पर खरा न उतरना अपने आप में उसे नकली या मिलावटी घोषित करने के समान नहीं है। आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों और लागू नियमों के अनुसार होगी।