summer express , यमुनानगर। धान की कटाई शुरू होने के साथ ही पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए जिला प्रशासन ने निगरानी व्यवस्था तेज कर दी है। पिछले वर्ष सामने आई पराली जलाने की घटनाओं को ध्यान में रखते हुए रादौर, सरस्वती नगर, व्यासपुर और जगाधरी को विशेष निगरानी वाले क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया गया है। बीते वर्ष जिले में पराली जलाने के सात मामले सामने आए थे।
प्रशासन ने इस बार ग्राम स्तर से जिला स्तर तक निगरानी और तत्काल कार्रवाई की व्यवस्था लागू की है। प्रत्येक 100 किसानों पर एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। ये अधिकारी किसानों को पराली प्रबंधन के प्रति जागरूक करने के साथ नियमित रूप से खेतों का निरीक्षण करेंगे और फसल कटाई तथा पराली प्रबंधन की स्थिति पर नजर रखेंगे।
किसी भी स्थान पर पराली जलाने की सूचना मिलने पर संबंधित टीम मौके पर पहुंचकर उसका सत्यापन करेगी। नोडल अधिकारियों की दैनिक रिपोर्ट की समीक्षा संबंधित एसडीएम करेंगे और इसकी समेकित रिपोर्ट जिला स्तर पर भेजी जाएगी।
प्रत्येक गांव में कृषि, राजस्व और पंचायत विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को शामिल कर ग्राम स्तरीय कमेटियां गठित की गई हैं। खंड स्तर पर खंड कृषि अधिकारी, उपमंडल स्तर पर एसडीएम या नामित अधिकारी तथा जिला स्तर पर उप निदेशक कृषि, जिला राजस्व अधिकारी और जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी निगरानी व्यवस्था का समन्वय करेंगे।
हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी और उनकी टीम भी फील्ड निरीक्षण, घटनाओं के सत्यापन और आवश्यक कार्रवाई में सहयोग करेगी। विशेष निगरानी वाले चारों क्षेत्रों में एसडीएम के साथ कृषि, राजस्व, पंचायत, पुलिस और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी व्यक्तिगत रूप से निगरानी सुनिश्चित करेंगे।
डीसी प्रीति ने कहा कि पराली जलाने की सूचना मिलते ही टीम मौके पर पहुंचकर जांच करेगी और नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने किसानों से पराली में आग न लगाने और उपलब्ध पराली प्रबंधन विकल्पों का इस्तेमाल करने की अपील की। प्रशासन का लक्ष्य पराली जलाने की घटनाओं पर पूरी तरह रोक लगाकर जिले को स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त बनाना है।