Summer express/बिलासपुर, सुभाष-:जिले में पशुओं के बीच फैल रही लंपी स्किन डिजीज को नियंत्रित करने की दिशा में पशुपालन विभाग को राहत मिली है। बीमारी के मामलों में लगातार कमी दर्ज की जा रही है और उपचार के बाद बड़ी संख्या में संक्रमित पशु स्वस्थ हो चुके हैं। विभाग के अनुसार फिलहाल करीब 40 एक्टिव केस हैं, जिनका उपचार और निगरानी की जा रही है।उप निदेशक पशुपालन विभाग डॉ. संदीप शर्मा ने बताया कि लंपी स्किन डिजीज एक वायरल और सेल्फ लिमिटिंग बीमारी है। बीमारी का एक निर्धारित चक्र होता है और अब इसके मामलों में कमी आने लगी है। उन्होंने बताया कि जिले में बीमारी के कारण करीब 16 से 17 पशुओं की मौत हुई है, जबकि अधिकांश संक्रमित पशु उपचार के बाद रिकवर कर चुके हैं।
डॉ. शर्मा के अनुसार पशुपालन विभाग की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में लगातार उपचार कार्य कर रही हैं। वहीं, जिन इलाकों में अभी बीमारी के मामले सामने नहीं आए हैं, वहां संक्रमण से बचाव के लिए टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। विभाग को उपलब्ध हुई वैक्सीन से अब तक करीब 19 हजार पशुओं का टीकाकरण किया जा चुका है। शेष करीब पांच से छह हजार खुराक को आगामी 10 से 15 दिनों में लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।उन्होंने बताया कि लंपी बीमारी मुख्य रूप से मच्छरों और अन्य वाहक कीटों के जरिए एक पशु से दूसरे पशु तक फैलती है। बरसात का मौसम समाप्त होने के साथ मच्छरों की संख्या में कमी आने पर बीमारी के प्रसार में भी कमी आने की संभावना है। हालांकि पशुपालकों को सतर्क रहने की जरूरत है।धलवार मेले के दौरान भी पशुपालन विभाग की टीम मौजूद रहेगी। प्रशासन के सहयोग से मेले में आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएंगी, ताकि पशुओं में संक्रमण फैलने की आशंका को कम किया जा सके।डॉ. शर्मा ने पशुपालकों से अपील की कि बाहर से खरीदे गए नए पशुओं को तुरंत पुराने पशुओं के साथ न रखें। नए पशु को कुछ दिनों तक अलग रखकर उसकी निगरानी करें। यदि पशु में लंपी स्किन डिजीज या किसी अन्य बीमारी के लक्षण दिखाई दें तो तत्काल पशु चिकित्सक या फार्मासिस्ट को सूचना दें। समय पर उपचार और सावधानी बरतने से संक्रमण को दूसरे पशुओं तक फैलने से रोका जा सकता है।