वड़िंग ने राहुल गांधी को इस्तीफा सौंपकर कहा- मैंने खुद पद छोड़ा
समर न्यूज | नई दिल्ली/चंडीगढ़
पंजाब कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर चल रही अटकलों पर शुक्रवार को विराम लग गया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने जालंधर कैंट से विधायक और पूर्व मंत्री परगट सिंह को तत्काल प्रभाव से पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष नियुक्त किया है। यह फैसला अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के राहुल गांधी को प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा सौंपने के कुछ घंटे बाद लिया गया। कांग्रेस ने वड़िंग के कार्यकाल और योगदान की भी सराहना की है।
वड़िंग ने शुक्रवार को नई दिल्ली में राहुल गांधी से मुलाकात कर इस्तीफा सौंपा। मुलाकात के बाद उन्होंने कहा कि उनसे किसी ने इस्तीफा देने के लिए नहीं कहा और उन्होंने खुद यह कदम उठाया है। उन्होंने राहुल गांधी के साथ पंजाब की राजनीतिक स्थिति, पार्टी की चुनौतियों और संगठन को मजबूत करने के उपायों पर चर्चा की। वड़िंग ने कहा कि कोई व्यक्ति हमेशा एक ही पद पर नहीं रह सकता और उन्हें कुछ समय के लिए छुट्टी लेने की जरूरत महसूस हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में पार्टी को जहां उनकी जरूरत होगी, वह उपलब्ध रहेंगे। सचिन पायलट की भूमिका के बारे में पूछे जाने पर वड़िंग ने कहा कि उन्हें निश्चित जानकारी नहीं है, लेकिन संभव है कि पायलट को लगा हो कि बदलाव जरूरी है।
पायलट की रिपोर्ट के बाद बदलाव
सचिन पायलट ने सितंबर में पंजाब कांग्रेस प्रभारी की जिम्मेदारी संभालने के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेताओं, सांसदों और अलग-अलग समूहों के साथ बैठकें की थीं। इन बैठकों के बाद संगठन की स्थिति को लेकर उनकी रिपोर्ट हाईकमान तक पहुंची। कांग्रेस के भीतर कई महीनों से नेतृत्व और गुटबाजी को लेकर मतभेद चल रहे थे। जुलाई में कांग्रेस ने वड़िंग को प्रदेश अध्यक्ष बनाए रखते हुए चरणजीत सिंह चन्नी को चुनाव अभियान समिति का अध्यक्ष, विजय इंदर सिंगला को चुनाव प्रबंधन एवं समन्वय समिति का अध्यक्ष और सुखजिंदर सिंह रंधावा को कोर कमेटी का अध्यक्ष बनाया था। परगट सिंह को घोषणापत्र समिति का सह-अध्यक्ष बनाया गया था।
परगट सिंह की राजनीतिक यात्रा
2012 में पहली बार जीता था चुनाव
परगट सिंह का जन्म 5 मार्च 1965 को जालंधर के मिट्ठापुर में हुआ। राजनीति में आने से पहले वह भारतीय हॉकी टीम के प्रमुख डिफेंडर और कप्तान रहे। उन्होंने 1992 बार्सिलोना और 1996 अटलांटा ओलंपिक में भारतीय टीम की कप्तानी की। हॉकी इंडिया के रिकॉर्ड के अनुसार दोनों ओलंपिक में भारतीय टीम क्रमश: सातवें और आठवें स्थान पर रही। उन्हें 1989 में अर्जुन पुरस्कार और 1998 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया। हॉकी से संन्यास के बाद परगट सिंह पंजाब पुलिस में रहे और बाद में राजनीति में आए। 2012 में उन्होंने जालंधर कैंट से शिरोमणि अकाली दल के टिकट पर विधानसभा चुनाव जीता। 2016 में अकाली दल से निलंबन के बाद उन्होंने नवजोत सिंह सिद्धू और बैंस बंधुओं के साथ आवाज-ए-पंजाब मंच बनाया। इसके बाद वह कांग्रेस में शामिल हुए और 2017 में कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में जालंधर कैंट से दोबारा जीते। 2022 में भी उन्होंने इसी सीट से कांग्रेस के टिकट पर जीत दर्ज की। कांग्रेस सरकार के दौरान परगट सिंह को शिक्षा, खेल एवं एनआरआई मामलों जैसे विभागों की जिम्मेदारी मिली थी। 2021 में उन्हें पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी का महासचिव भी बनाया गया था। बाद में वह अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी में सचिव की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। 2026 के संगठनात्मक ढांचे में वह पंजाब कांग्रेस की घोषणापत्र समिति के सह-अध्यक्ष थे।
हालिया मुद्दों पर सक्रिय रहे
प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने से पहले भी परगट सिंह पंजाब के राजनीतिक मुद्दों पर लगातार सक्रिय रहे हैं। 28 सितंबर को नशे के मुद्दे पर उन्होंने कहा था कि राज्य और केंद्र सरकारों को एक-दूसरे पर आरोप लगाने के बजाय जवाबदेही तय करने के लिए समन्वित व्यवस्था बनानी चाहिए। उन्होंने नशे की पूरी सप्लाई चेन और उसके पीछे मौजूद नेटवर्क पर कार्रवाई की मांग की थी। सोशल मीडिया पर हालिया पोस्ट में उन्होंने पंजाब में बिजली कटौती को लेकर आम आदमी पार्टी सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने जालंधर में रात के समय लंबी बिजली कटौती का दावा किया। इससे पहले उन्होंने सचिन पायलट से मुलाकात के बाद कहा था कि मजबूत, ईमानदार और एकजुट टीम के साथ पंजाब कांग्रेस को नई दिशा और ऊर्जा देने की जरूरत है।