Summer express, चंडीगढ़। हरियाणा में समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस के विरोध में बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों की हड़ताल के बीच ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन (एआईपीईएफ) ने राज्य सरकार से तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। फेडरेशन ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से कैबिनेट की बैठक बुलाकर पूरे प्रदेश में समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस की अनुमति नहीं देने का नीतिगत फैसला लेने की अपील की है। साथ ही गुरुग्राम और नूंह में इलेवन पावर कंपनी को दिए गए लाइसेंस रद्द कराने के लिए कानूनी कार्रवाई करने की मांग उठाई है।
उत्तरी हरियाणा बिजली वितरण निगम के पंचकूला स्थित मुख्यालय पर हड़ताल के बाद आयोजित सभा में एआईपीईएफ के चेयरमैन इंजीनियर शैलेन्द्र दुबे, हरियाणा पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष इंजीनियर पुनीत कुंडू और महासचिव इंजीनियर रविंदर सिंह घनघस ने सरकार से इस मामले में ठोस कदम उठाने को कहा। शैलेन्द्र दुबे ने कहा कि सरकार को केवल अपीलीय विद्युत न्यायाधिकरण (एपीटीईएल) में अपील करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि विद्युत अधिनियम, 2003 के तहत उपलब्ध कानूनी अधिकारों का इस्तेमाल कर लाइसेंस रद्द कराने के लिए भी प्रयास करने चाहिए।
फेडरेशन के नेताओं ने हरियाणा विद्युत नियामक आयोग (एचईआरसी) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए इलेवन पावर कंपनी को लाइसेंस देने की प्रक्रिया की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराने की मांग की। उन्होंने कंपनी के बिजली वितरण क्षेत्र में अनुभव, तकनीकी क्षमता और वित्तीय स्थिति को लेकर सवाल उठाए। नेताओं ने कहा कि सार्वजनिक किया जाना चाहिए कि कंपनी की पात्रता और निवेश क्षमता का आकलन किन मानकों के आधार पर किया गया। उन्होंने आयोग के अध्यक्ष मुकेश गर्ग के नेतृत्व में लिए गए फैसले की समीक्षा की मांग भी की। फेडरेशन का आरोप है कि इस तरह के फैसले से बिजली क्षेत्र में निजीकरण को बढ़ावा मिल सकता है।
फेडरेशन के पदाधिकारियों ने कहा कि हरियाणा कृषि प्रधान राज्य है और समानांतर बिजली वितरण व्यवस्था लागू होने से सार्वजनिक बिजली वितरण कंपनियों के राजस्व पर असर पड़ सकता है। उनके अनुसार, इसका खामियाजा किसानों और आम उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ सकता है। उन्होंने सरकार से निजी कंपनियों के मुनाफे के बजाय सार्वजनिक बिजली व्यवस्था को मजबूत करने तथा उपभोक्ताओं को निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण बिजली उपलब्ध कराने को प्राथमिकता देने की अपील की।
शैलेन्द्र दुबे ने दावा किया कि हड़ताल में 90 प्रतिशत से अधिक बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों ने भाग लिया। उन्होंने इसे कर्मचारियों की एकजुटता का प्रमाण बताया। साथ ही चेतावनी दी कि यदि आंदोलन के दौरान किसी कर्मचारी या इंजीनियर के खिलाफ उत्पीड़न या दमनात्मक कार्रवाई की गई, तो दूसरे राज्यों के बिजली कर्मचारी और इंजीनियर भी आंदोलन में शामिल हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में हड़ताल देशव्यापी रूप ले सकती है।
फेडरेशन ने सरकार से लाइसेंस देने की प्रक्रिया की समीक्षा कराने, गुरुग्राम और नूंह में जारी लाइसेंस के संबंध में आवश्यक कानूनी कदम उठाने तथा हड़ताल में शामिल कर्मचारियों के खिलाफ प्रतिशोधात्मक कार्रवाई नहीं करने की मांग की। दुबे ने कहा कि एआईपीईएफ हरियाणा के बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों के साथ खड़ा है। फेडरेशन के मुताबिक, बिजली क्षेत्र से जुड़े निर्णय लेते समय किसानों, उपभोक्ताओं, कर्मचारियों और सार्वजनिक बिजली व्यवस्था के हितों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।