Summer express/शिमला/संजू -: करवाचौथ के पर्व को लेकर बाजारों में रौनक बढ़ने लगी है। सुहागिन महिलाएं व्रत की तैयारियों के साथ खरीदारी में जुटी हुई हैं। इस वर्ष करवाचौथ का व्रत 29 अक्टूबर को मनाया जाएगा। मान्यता है कि इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। सुबह सरगी ग्रहण करने के बाद शुरू होने वाला यह व्रत रात को चंद्रमा के दर्शन और अर्घ्य देने के बाद खोला जाता है। इस बार शुक्र अस्त होने के कारण धार्मिक विधि-विधानों को लेकर भी चर्चा हो रही है। हालांकि, पंडित उमेश नौटियाल के अनुसार, शुक्र अस्त के बाल्य दोष के बावजूद सुहागिन महिलाएं और नवविवाहिताएं करवाचौथ का व्रत रख सकती हैं। इस दिन भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।
पंडित उमेश नौटियाल ने बताया कि करवाचौथ, जिसे कारक चतुर्थी भी कहा जाता है, भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा में विशेष महत्व रखता है। उत्तर भारत सहित देश के कई हिस्सों में विवाहित महिलाएं इस पर्व को श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाती हैं। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और दांपत्य जीवन में सुख-शांति की कामना करती हैं।उन्होंने बताया कि इस वर्ष 28 अक्टूबर को शुक्र अस्त हो रहा है, जिसका बाल्य दोष 30 अक्टूबर तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पहले से किए जा रहे व्रत को बीच में छोड़ना उचित नहीं माना जाता। ऐसे में सुहागिन महिलाएं करवाचौथ का व्रत रख सकती हैं। हालांकि, शुक्र अस्त की अवधि में उद्यापन और कुछ बड़े धार्मिक अनुष्ठानों से बचने की सलाह दी गई है। पहली बार व्रत रखने वाली महिलाएं भी अपनी पारिवारिक परंपरा और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार व्रत कर सकती हैं।
सरगी ग्रहण करने का समय सुबह 3:30 बजे से 5:30 बजे तक
व्रत की तैयारियों के लिए सुबह 3:30 बजे से 5:30 बजे तक सरगी ग्रहण करने का समय बताया गया है। इसके बाद महिलाएं दिनभर व्रत रखेंगी। शाम को पूजा के लिए 5:38 बजे से 6:56 बजे तक का समय निर्धारित बताया गया है। रात 8:05 बजे चंद्रोदय होने की संभावना है। चंद्रमा को अर्घ्य देने और पति के दर्शन के बाद महिलाएं व्रत खोलेंगी।पंडित नौटियाल के अनुसार, गर्भवती महिलाओं को व्रत के दौरान अपनी सेहत का विशेष ध्यान रखना चाहिए। जरूरत पड़ने पर वे चिकित्सकीय सलाह लेकर फलाहार कर सकती हैं। धार्मिक आस्था के साथ स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी जरूरी है।