Summer express, नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली में आग लगने की घटनाएं समय-समय पर बड़े हादसों का रूप लेती रही हैं। झुग्गी बस्तियों, होटलों, फैक्ट्रियों, अस्पतालों और व्यावसायिक इमारतों में लगी आग ने कई बार लोगों को संभलने तक का मौका नहीं दिया। इन हादसों में सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है, जबकि अनेक परिवारों ने अपनों को खोया है।
दिल्ली में आग लगने की घटनाओं के पीछे शॉर्ट सर्किट, सुरक्षा इंतजामों की कमी, अवैध निर्माण और ज्वलनशील सामग्री का असुरक्षित भंडारण जैसी वजहें सामने आती रही हैं। कई हादसों में दमकल और बचाव कार्यों के बावजूद लोगों को बचाया नहीं जा सका। राजधानी में हुए कुछ बड़े अग्निकांड आज भी लोगों के जेहन में ताजा हैं।
12 जून 2026 को तुगलकाबाद एक्सटेंशन में भीषण आग लगने से एक ही परिवार के तीन सदस्यों की मौत हो गई थी। वहीं, 3 जून 2026 को हौजरानी इलाके के एक गेस्ट हाउस में आग लगने से 23 लोगों की जान चली गई थी।
15 फरवरी 2024 को अलीपुर की एक पेंट फैक्ट्री में आग लगने से 11 मजदूरों की मौत हो गई थी, जबकि कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। इससे पहले 25 मई 2024 को विवेक विहार स्थित बेबी केयर न्यूबॉर्न अस्पताल में आग लगने से सात नवजात शिशुओं की मौत हो गई थी। इस हादसे में ऑक्सीजन सिलेंडर में विस्फोट को आग फैलने की वजह बताया गया था।
13 मई 2022 को मुंडका में मेट्रो पिलर नंबर 544 के पास स्थित चार मंजिला व्यावसायिक इमारत में आग लगने से 27 लोगों की जान चली गई थी। वहीं, 2019 में भी दिल्ली को दो बड़े अग्निकांडों का सामना करना पड़ा। 12 फरवरी को करोल बाग के अर्पित पैलेस होटल में आग लगने से 17 लोगों की मौत हुई थी। इनमें एक बच्चा भी शामिल था। इसके बाद 8 दिसंबर 2019 को रानी झांसी रोड स्थित अनाज मंडी की इमारत में भीषण आग लगी। इस हादसे में 43 लोगों की मौत हो गई थी। मृतकों में अधिकतर मजदूर थे, जो घटना के समय इमारत के अंदर सो रहे थे।
20 जनवरी 2018 को बवाना औद्योगिक क्षेत्र की पटाखा और प्लास्टिक इकाई में आग लगने से 17 लोगों की मौत हुई थी। इसी वर्ष 13 अप्रैल को कोहाट एन्क्लेव के एक मकान में आग लगने से एक ही परिवार के चार सदस्यों की जान चली गई थी। 19 नवंबर 2018 को करोल बाग की एक फैक्ट्री में आग लगने से चार लोगों की मौत हुई थी और एक व्यक्ति घायल हुआ था।
इससे पहले 20 नवंबर 2011 को नंद नगरी के सामुदायिक भवन में आग लगने से 14 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 30 से अधिक लोग घायल हुए थे।
लगातार सामने आते रहे ये हादसे अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। हर बड़े अग्निकांड के बाद सुरक्षा मानकों और बचाव इंतजामों पर चर्चा होती है, लेकिन ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना आज भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।