समर न्यूज | मानसा
पंजाब के मानसा जिले के गांव भंमे कलां के दलजीत सिंह की मौत का मामला लगातार तूल पकड़ रहा है। मृतक की मां और पत्नी ने रविवार को परविंदर सिंह झोटा के समर्थन में मानसा में चल रहे धरने में पहुंचकर न्याय की मांग की। परिवार ने स्पष्ट किया है कि जब तक लखा सिधाना, मोहनजीत शेरों और अन्य गिरफ्तार युवाओं को रिहा नहीं किया जाता तथा उनके खिलाफ दर्ज मामले रद्द नहीं होते, तब तक दलजीत का अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा। गांव की पंचायत और ग्रामीणों ने भी परिवार के इस फैसले का समर्थन किया है। दलजीत की मौत के बाद से ही परिवार और पुलिस के बीच घटनाक्रम को लेकर मतभेद सामने आए हैं। परिजनों का आरोप है कि दलजीत की मौत नशे की अधिक मात्रा लेने से हुई। उनका कहना है कि क्षेत्र में नशे की बिक्री पर रोक लगाने और इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं, पुलिस ने शुरुआती जांच में इसे हत्या का मामला बताया था।
{शव को लेकर पुलिस से हुआ था टकराव…
यह विवाद 27 अक्तूबर को उस समय बढ़ा था, जब दलजीत का शव मानसा ले जाकर झोटा के समर्थन में चल रहे धरने में शामिल करने की कोशिश की गई। पुलिस ने रास्ते में बैरिकेडिंग कर शव को अपने कब्जे में ले लिया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई। पुलिस ने अपने कर्मचारियों पर हमले और दलजीत की मौत के मामले में अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज कीं। लखा सिधाना और मोहनजीत शेरों सहित कई लोगों को गिरफ्तार किया गया। दोनों को अदालत ने चार दिन के पुलिस रिमांड पर भेजा था।
{पिता की अपील से परिवार में मतभेद…
इस बीच परिवार के भीतर भी अंतिम संस्कार को लेकर अलग-अलग रुख सामने आया है। दलजीत के पिता जर्नैल सिंह गांव में रहकर परिजनों से अंतिम संस्कार के लिए लौटने की अपील कर रहे हैं, जबकि मां, पत्नी और बहन धरने पर डटी हैं। उधर, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी मामले का संज्ञान लेते हुए पंजाब के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक से दो सप्ताह में कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है। पुलिस का कहना है कि दलजीत की मौत के कारणों का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट से चलेगा। इस तरह नशे के खिलाफ कार्रवाई की मांग से शुरू हुआ मामला अब पुलिस कार्रवाई, गिरफ्तारियों और अंतिम संस्कार को लेकर बड़े विवाद में बदल गया है।