Summer express, हिसार। नवंबर की शुरुआत के साथ ही हरियाणा में ठंड का असर बढ़ने लगा है। सुबह और शाम के समय ठंड महसूस हो रही है, जबकि दोपहर में भी मौसम में ठंडक बनी हुई है। मौसम में आए इस बदलाव के बीच प्रदेश के कई शहरों में वायु प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ रहा है। स्थिति यह है कि कैथल, गुरुग्राम, फरीदाबाद और बहादुरगढ़ में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 300 के पार पहुंच गया है। कैथल 324 एक्यूआई के साथ प्रदेश में सबसे अधिक प्रदूषित शहर दर्ज किया गया।
दो नवंबर की सुबह आठ बजे तक उपलब्ध केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी), भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम) और सफर के समेकित आंकड़ों के अनुसार, गुरुग्राम का एक्यूआई 318, फरीदाबाद का 312 और बहादुरगढ़ का 305 दर्ज किया गया। इन सभी शहरों में हवा की गुणवत्ता गंभीर श्रेणी में पहुंच गई है। वहीं, सोनीपत में एक्यूआई 292 और पानीपत में 284 दर्ज किया गया, जो खराब श्रेणी में आता है।
हिसार में भी प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ा है। यहां दो नवंबर की सुबह एक्यूआई 188 दर्ज किया गया, जबकि एक नवंबर को सीपीसीबी के शाम चार बजे जारी बुलेटिन में यह 133 था। इसी तरह पश्चिमी हरियाणा के अन्य जिलों में भी वायु गुणवत्ता में गिरावट दर्ज की गई। भिवानी का एक्यूआई 108 से बढ़कर 175 और सिरसा का 106 से बढ़कर 164 हो गया। आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश के पश्चिमी हिस्सों में भी प्रदूषण का असर लगातार बढ़ रहा है।
प्रदूषण बढ़ने के साथ ही हवा में मौजूद सूक्ष्म कणों का स्तर भी चिंता बढ़ा रहा है। दो नवंबर की समेकित रिपोर्ट के अनुसार, गुरुग्राम और फरीदाबाद के निगरानी केंद्रों पर पीएम 2.5 का औसत स्तर 175 से 195 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया। वहीं, हिसार और रोहतक में यह स्तर 110 से 130 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रहा। निर्धारित मानक 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर है। इसके अलावा एनसीआर के सोनीपत, पानीपत और गुरुग्राम क्षेत्र में पीएम 10 का स्तर 310 से 345 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक पहुंच गया, जबकि इसका निर्धारित मानक 100 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर है।
विशेषज्ञों के अनुसार, हवा की रफ्तार कम होने और वातावरण में मिश्रण की ऊंचाई घटने के कारण प्रदूषक कण तेजी से फैल नहीं पा रहे हैं। समेकित रिपोर्ट में सतह पर हवा की गति 2.4 से 4.1 किलोमीटर प्रति घंटा दर्ज की गई। सुबह के समय वातावरण में मिश्रण की ऊंचाई केवल 150 से 200 मीटर रही, जबकि सापेक्ष आर्द्रता 78 से 88 प्रतिशत के बीच दर्ज की गई। इन परिस्थितियों में प्रदूषक कण निचली वायुमंडलीय परत में जमा हो जाते हैं। वहीं, आईआईटीएम की एक नवंबर की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश में औसत दृश्यता भी 500 मीटर से नीचे आ गई थी।
लगातार बिगड़ती हवा की गुणवत्ता को देखते हुए लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है। खराब और गंभीर श्रेणी के प्रदूषण में लंबे समय तक रहने से सांस लेने में परेशानी और आंखों में जलन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। बच्चों, बुजुर्गों और पहले से श्वसन संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए। प्रदूषण का स्तर अधिक रहने पर खुले में लंबे समय तक व्यायाम करने और अनावश्यक रूप से बाहर रहने से बचना चाहिए।