हर्षवर्धन चौहान ने मुख्यमंत्री सुक्खू की पैरवी को दिया जीत का श्रेय, किशाऊ बांध परियोजना में भी प्रदेश को 3 से 4 हजार करोड़ की संभावित बचत
Summer express/शिमला/ संजू- -:हिमाचल प्रदेश को बीबीएमबी यानी भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड से जुड़े बिजली हिस्सेदारी के पुराने विवाद में बड़ी कामयाबी मिली है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब प्रदेश को दशकों से लंबित बिजली हिस्सेदारी का लाभ मिलने का रास्ता साफ हो गया है। उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने इसे हिमाचल के अधिकारों की बड़ी जीत बताते हुए कहा कि इस फैसले से प्रदेश को हर साल करीब 600 से 1000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आमदनी हो सकती है। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की मजबूत पैरवी और सरकार की प्रभावी कानूनी रणनीति को दिया।
हर्षवर्धन चौहान ने बताया कि बीबीएमबी में हिमाचल प्रदेश की 7.19 प्रतिशत बिजली हिस्सेदारी का अधिकार पहले से निर्धारित था, लेकिन पिछले 30 से 40 वर्षों के बकाया हिस्से को लेकर विवाद चल रहा था। इस मामले में वर्ष 1996 में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। वहीं, वर्ष 2011 से प्रदेश को 7.19 प्रतिशत बिजली हिस्सेदारी मिलनी शुरू हुई। अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पुराने बकाये का रास्ता साफ हुआ है। चौहान के अनुसार, हिमाचल को कुल 11,975 मिलियन यूनिट बिजली मिलेगी, जिसे बेचकर प्रदेश अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर सकेगा।उद्योग मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री सुक्खू ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सुप्रीम कोर्ट में प्रदेश का पक्ष रखने के लिए देश के वरिष्ठ वकीलों की सेवाएं लीं। इसके साथ ही केंद्र सरकार के स्तर पर भी लगातार पैरवी की गई। सरकार के इन्हीं प्रयासों का नतीजा है कि हिमाचल को अपने अधिकारों के अनुरूप लाभ मिलने की उम्मीद जगी है।
वहीं, किशाऊ बांध परियोजना को लेकर भी चौहान ने प्रदेश के हित में लिए गए फैसले का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने परियोजना से जुड़े बिजली उत्पादन के वित्तीय बोझ को अकेले हिमाचल पर डालने का विरोध किया। केंद्र के साथ बातचीत के बाद अब इस खर्च को पांच साझेदार राज्यों में बांटने पर सहमति बनी है। इससे हिमाचल को करीब 3 से 4 हजार करोड़ रुपये के संभावित आर्थिक बोझ से राहत मिलेगी।इस दौरान हर्षवर्धन चौहान ने नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर पर भी निशाना साधा। उन्होंने सवाल उठाया कि वर्ष 2017 से 2022 तक भाजपा सरकार के कार्यकाल में बीबीएमबी के बकाया हिस्से और किशाऊ बांध जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को सुलझाने के लिए क्या प्रयास किए गए? हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि वह पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह समेत किसी भी पूर्व मुख्यमंत्री के योगदान को नकार नहीं रहे हैं।चौहान ने वाइल्डफ्लावर हॉल मामले में हुए समझौते का भी उल्लेख किया और कहा कि इससे प्रदेश को करीब 400 करोड़ रुपये का लाभ हुआ है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सुक्खू सरकार का लक्ष्य वर्ष 2032 तक हिमाचल को आत्मनिर्भर राज्य बनाना है और प्रदेश के आर्थिक हितों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।