Dharamshala, Sanjeev
पौंग बांध में पंडोह डैम से बहकर आई बेशकीमती देवदार और कायल की लकड़ी विभागीय अनदेखी के कारण अब सड़ने के कगार पर है। झील के विभिन्न हिस्सों में लकड़ी का बड़ा जखीरा जमा है, जिसे न तो वन्य प्राणी विभाग ने अब तक उठाया और न ही स्थानीय लोगों को इसे उपयोग में लाने की अनुमति दी जा रही है।
6 और 7 अगस्त को बांध से छोड़े गए पानी के चलते बड़ी मात्रा में लकड़ी ब्यास नदी में बहकर निचले इलाकों में पहुंच गई। इससे सरकार को करोड़ों रुपये के संभावित राजस्व का नुकसान हुआ है।
स्थानीय पंचायतों ने उठाई आवाज, कहा- लकड़ी दे सरकार, हम बना लेंगे किस्ती
खटियाड़ पंचायत के प्रधान सुरजीत सिंह और ग्रामीण रमेशा सिंह ने बताया कि यह लकड़ी अच्छी हालत में है और इससे मछुआरे अपनी जीविका के लिए नावें (किस्ती) बना सकते हैं। उन्होंने कहा, “जब सरकार किस्ती निर्माण के लिए आर्थिक मदद देती है, तो यह लकड़ी देने में आपत्ति क्यों?”
विभाग बोले- लकड़ी बेकार है, उठाने वालों पर होगी कार्रवाई
वन्य प्राणी विभाग के डीएफओ हमीरपुर, रेजीनोड रॉयस्टोन ने बयान में कहा कि यह लकड़ी सड़ चुकी है और उपयोग लायक नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति इस लकड़ी को उठाते हुए पकड़ा गया, तो उस पर कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
स्थानीयों ने विभागीय तर्क को बताया हास्यास्पद
स्थानीय लोगों का कहना है कि विभाग का यह दावा ग़लत है। उन्होंने दो महीने पहले ही विभाग को झील में बहकर आई इस लकड़ी की सूचना दे दी थी, लेकिन कोई कदम नहीं उठाया गया। अब जब लकड़ी नष्ट हो रही है, तो उसे “बेकार” बताकर पल्ला झाड़ा जा रहा है।
लोगों की मांगें
- लकड़ी को शीघ्र उठाकर संरक्षित किया जाए
- या फिर मछुआरों व ग्रामीणों को उपयोग की अनुमति दी जाए
- भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचाव हेतु स्थायी नीति बनाई जाए
निष्कर्ष:
सरकार और विभाग के सामने अब यह बड़ा सवाल है कि क्या प्राकृतिक रूप से आई इस इमारती लकड़ी को संरक्षित कर इसका सदुपयोग किया जाएगा, या इसे यूं ही सड़ने और बह जाने दिया जाएगा।