नई दिल्ली | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्व संस्कृत दिवस पर कहा कि उनकी सरकार ने पिछले दस वर्षों में संस्कृत भाषा को लोकप्रिय बनाने के लिए कई अहम कदम उठाए हैं। उन्होंने बताया कि संस्कृत ज्ञान और अभिव्यक्ति का शाश्वत स्रोत है, जिसका प्रभाव शिक्षा, साहित्य और संस्कृति के हर क्षेत्र में दिखाई देता है। मोदी ने इस भाषा को बढ़ावा देने के लिए केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय की स्थापना, शिक्षण केंद्रों का निर्माण, विद्वानों को अनुदान और प्राचीन पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण जैसे महत्वपूर्ण प्रयासों का जिक्र किया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि इन पहलों से देशभर के विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं को फायदा हुआ है। उन्होंने संस्कृत की समृद्ध विरासत, जिसमें हिंदू महाकाव्यों और कई प्राचीन ग्रंथ शामिल हैं, को भी याद किया। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि आज संस्कृत भाषा मुख्यतः धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित हो गई है, और इसे व्यापक रूप से पुनर्जीवित करने की जरूरत है।
यह दिन हर साल श्रावण पूर्णिमा को विश्व संस्कृत दिवस के रूप में मनाया जाता है, जो इस प्राचीन भाषा की महत्ता को याद करने और इसे बढ़ावा देने का अवसर प्रदान करता है।