Hamirpur, Arvind
पर्यावरण के संतुलन के प्रतीक गिद्ध अब हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा ज़िले से पाकिस्तान की सीमा तक उड़ान भर रहे हैं। वन्य प्राणी विभाग और वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा किए गए संयुक्त सर्वे में यह जानकारी सामने आई है।
विभाग ने पाँच व्हाइट-रंप्ड वल्चर (White-rumped Vulture) को रेडियो टैगिंग और कॉलरिंग की है, जिनकी मूवमेंट पाकिस्तान बॉर्डर तक रिकॉर्ड की गई है। इसके अलावा, हालिया सर्वे में इस दुर्लभ प्रजाति के 500 नए घोंसले मिलने से विभाग में उत्साह का माहौल है। माना जा रहा है कि इन घोंसलों में हजारों अंडे हो सकते हैं।कांगड़ा जिले में व्हाइट-रंप्ड वल्चर के अलावा अन्य प्रजातियों के गिद्ध भी पाए जाते हैं, लेकिन इस सर्वे को विशेष रूप से इसी प्रजाति पर केंद्रित किया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ये गिद्ध इतनी लंबी उड़ान भर रहे हैं तो यह संकेत है कि वे अन्य सुरक्षित स्थानों पर भी अपने घोंसले बना रहे होंगे।
विभाग अब उन स्थानों पर फीडिंग स्टेशन विकसित करने की योजना बना रहा है जहाँ गिद्धों के घोंसले अधिक संख्या में मिले हैं। इससे उन्हें पर्याप्त भोजन मिलता रहे। पुराने प्राकृतिक फीडिंग स्टेशनों को भी पुनः सक्रिय और सुदृढ़ किया जाएगा। पौंग डैम के पास पहले से ही दो फीडिंग स्टेशन हैं, जहाँ स्थानीय लोग अपने मृत पशुओं को पहुँचाते हैं।
डीएफओ (वाइल्ड लाइफ) रेजिनॉल्ड रॉयस्टन ने बताया कि कांगड़ा में व्हाइट-रंप्ड वल्चर प्रजाति का सर्वे किया गया जिसमें 500 नए घोंसले मिले हैं। पाँच गिद्धों की रेडियो टैगिंग और कॉलरिंग की गई है। इनकी मूवमेंट पाकिस्तान सीमा तक दर्ज हुई है। जहाँ भी गिद्धों की संख्या अधिक मिली है, वहाँ फीडिंग स्टेशनों को सुदृढ़ करने की योजना है।