उरुग्वे | उरुग्वे की सीनेट ने बुधवार को इच्छामृत्यु को अपराधमुक्त करने वाला ऐतिहासिक कानून पारित कर दिया। इस कदम के साथ उरुग्वे दक्षिण अमेरिका के उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है, जहाँ गंभीर रूप से बीमार मरीज कानूनी तौर पर अपने जीवन समाप्त करने के लिए सहायता प्राप्त कर सकते हैं। राजधानी मोंटेवीडियो में सत्तारूढ़ वामपंथी गठबंधन की सीनेटर पेट्रीसिया क्रेमर ने कहा कि यह निर्णय जनता की इच्छा के अनुरूप है।
पार्लियामेंट के उच्च सदन में 31 में से 20 सीनेटरों ने विधेयक के पक्ष में मतदान किया, जबकि निचले सदन ने इसे अगस्त में भारी बहुमत से मंजूरी दी थी। इस कानून के लागू होने के साथ उरुग्वे कैथोलिक बहुल लैटिन अमेरिका का पहला ऐसा देश बन गया है जहाँ इच्छामृत्यु को कानूनी अनुमति मिली है।
अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में इच्छामृत्यु के लिए आवेदन केवल उन मरीजों को किया जा सकता है जिनकी जीवित रहने की संभावना छह महीने या एक साल से अधिक नहीं होती। लेकिन उरुग्वे में नियम सरल हैं—असहनीय पीड़ा झेल रहे किसी भी लाइलाज रोग से पीड़ित व्यक्ति इसके लिए आवेदन कर सकता है। इच्छामृत्यु के लिए मानसिक रूप से सक्षम होना अनिवार्य है, लेकिन नाबालिगों को यह सुविधा नहीं दी जाएगी।
दुनिया में इच्छामृत्यु की अनुमति देने वाले प्रमुख देशों में नीदरलैंड, बेल्जियम, लक्ज़मबर्ग, कनाडा, कोलंबिया, न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, स्पेन और पुर्तगाल शामिल हैं। हर देश में इसके नियम अलग हैं।
नीदरलैंड 2002 में पहला देश बना जिसने इच्छामृत्यु को कानूनी मान्यता दी। बेल्जियम में 2002 में नाबालिगों को भी अनुमति मिली। लक्ज़मबर्ग ने 2009 में इसे कानूनी किया। कनाडा ने 2016 में “Medical Assistance in Dying” लागू किया। कोलंबिया ने 1997 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले और 2015 में औपचारिक रूप से इसे वैध किया। न्यूजीलैंड ने 2019 में कानून पारित किया और 2021 से लागू किया। ऑस्ट्रेलिया में अलग-अलग राज्यों में 2017 से लागू है। स्पेन ने 2021 में जबकि पुर्तगाल ने 2023 में इच्छामृत्यु कानून पारित किया। उरुग्वे का यह कदम लैटिन अमेरिका में मानवाधिकार और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की दिशा में एक बड़ा परिवर्तन माना जा रहा है।