पंजाब | पंजाब में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस पार्टी के अंदरूनी मतभेद तेजी से उभरने लगे हैं। पार्टी के भीतर नेतृत्व और प्रतिनिधित्व को लेकर चर्चा गर्म है। पूर्व मुख्यमंत्री और जालंधर से सांसद चरणजीत सिंह चन्नी ने हाल ही में पदों के बंटवारे पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि दलित समुदाय को कांग्रेस में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिला, जबकि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष, विधानसभा में नेता विपक्ष और छात्र संगठन एनएसयूआई के तीन प्रमुख पद जट्ट सिख नेताओं के पास हैं।
यह विवाद चन्नी द्वारा शनिवार को चंडीगढ़ में आयोजित प्रदेश कांग्रेस एससी सेल की बैठक में उठाया गया। बैठक के दौरान एससी नेताओं में नाराजगी और तनाव देखने को मिला। इसके बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि चन्नी को पार्टी ने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी हैं। उन्होंने बताया कि दो बार विधानसभा चुनाव हारने के बावजूद, चन्नी को जालंधर से सांसद बनाया गया, साथ ही उन्हें कांग्रेस वर्किंग कमेटी और लोकसभा की कृषि समिति की अध्यक्षता जैसी जिम्मेदारी भी दी गई।
वड़िंग ने यह भी स्पष्ट किया कि कांग्रेस में जाति आधारित भेदभाव नहीं होता और दलित समाज को हमेशा सम्मान मिला है। उन्होंने कहा कि चन्नी के बयान का उद्देश्य गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया है।
चरणजीत सिंह चन्नी ने भी अपने बयान को स्पष्ट किया। उनका कहना था कि उनकी मांग केवल सामाजिक न्याय और उचित प्रतिनिधित्व के लिए थी, किसी जाति या समुदाय के खिलाफ नहीं। उन्होंने कहा कि वे हमेशा सभी समुदायों के साथ खड़े रहे हैं और उनका मुद्दा केवल बराबरी और न्याय से संबंधित है, न कि किसी तरह की जातीय राजनीति से।