सोनीपत। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार को सोनीपत के मुरथल स्थित बाबा नागे वाला धाम पहुंचे, जहां उन्होंने मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। इस अवसर पर उन्होंने अष्टम भंडारे में भाग लिया और नाथ संप्रदाय के संतों व श्रद्धालुओं को संबोधित किया। कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में साधु-संत और भक्त मौजूद रहे। मुख्यमंत्री के मंच पर पहुंचते ही परिसर जयकारों से गूंज उठा।
अपने संबोधन की शुरुआत योगी आदित्यनाथ ने संतों के नाम लेकर की और आयोजन से जुड़े महंतों व व्यवस्थापकों को बधाई दी। उन्होंने गोरक्षपीठाधीश्वर महंत बालक नाथ महाराज सहित सभी आयोजकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि नाथ संप्रदाय भारत की सबसे प्राचीन और प्रभावशाली सांस्कृतिक परंपराओं में से एक है, जिसने समाज को जीवन जीने की सही दिशा दिखाई है और सनातन धर्म को मजबूती प्रदान की है।
माघ मेले और ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से जुड़े विवाद के बीच योगी आदित्यनाथ ने संन्यास और राष्ट्र को लेकर कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि एक योगी, संत या संन्यासी के लिए धर्म और राष्ट्र से बढ़कर कुछ नहीं होता। संन्यासी की कोई निजी संपत्ति नहीं होती, उसकी वास्तविक संपत्ति धर्म है और राष्ट्र ही उसका स्वाभिमान होता है।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीते 11 वर्षों की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि राम मंदिर का निर्माण कभी एक सपना था, लेकिन मजबूत और निर्णायक सरकार के कारण वह साकार हुआ। आज अयोध्या और काशी जैसे तीर्थस्थल राष्ट्रीय आस्था के केंद्र बन चुके हैं। उन्होंने प्रयागराज महाकुंभ का उल्लेख करते हुए बताया कि मौनी अमावस्या पर करोड़ों श्रद्धालुओं ने संगम में आस्था की डुबकी लगाई।
योगी आदित्यनाथ ने नशे को युवा पीढ़ी के लिए सबसे बड़ा खतरा बताते हुए कहा कि नशा समाज और राष्ट्र दोनों को कमजोर करता है। उन्होंने युवाओं को नशे से दूर रखने और इसके खिलाफ सामूहिक अभियान चलाने का आह्वान किया। साथ ही सीमापार से आने वाले नशे और उसके नेटवर्क के खिलाफ सख्त कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया।
धर्मांतरण और लव जिहाद के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि सनातन धर्म को मजबूत किए बिना इन साजिशों को रोका नहीं जा सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि धर्म आस्था का विषय है, उसे किसी पर थोपा नहीं जा सकता।
पर्यावरण संरक्षण पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने नदियों और तालाबों के संरक्षण की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि सरस्वती नदी के पुनर्जीवन जैसे प्रयास आने वाली पीढ़ियों के लिए जरूरी हैं। अंत में योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत आने वाले हजार वर्षों तक विश्व पटल पर अपनी पहचान बनाए रखेगा और हर मंदिर को धाम के रूप में विकसित करना सरकार का लक्ष्य है।