वाशिंगटन | अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने क्यूबा को तेल बेचने वाले देशों के खिलाफ सख्त कदम उठाया है। उन्होंने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत क्यूबा को तेल या ऊर्जा सहायता देने वाले देशों से अमेरिका आने वाले सामान पर अतिरिक्त टैरिफ लगाया जाएगा। यह कदम क्यूबा सरकार पर आर्थिक दबाव बनाने और क्षेत्रीय देशों को उससे दूरी बनाने के लिए उठाया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह आदेश क्यूबा की पहले से कमजोर अर्थव्यवस्था को और प्रभावित कर सकता है। साथ ही यह अमेरिकी प्रशासन की चेतावनी भी है उन देशों के लिए, जो अब भी क्यूबा को तेल या ऊर्जा सप्लाई कर रहे हैं। इस कदम का सीधा असर मेक्सिको पर भी पड़ा है। मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाम ने इस सप्ताह कहा कि उनकी सरकार ने क्यूबा को तेल आपूर्ति अस्थायी रूप से रोक दी है, हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि यह “संप्रभु निर्णय” है, अमेरिका के दबाव में नहीं।
राष्ट्रपति ट्रंप लगातार मेक्सिको पर दबाव बनाए हुए हैं ताकि वह क्यूबा से दूरी बनाए। अमेरिका क्यूबा की समाजवादी सरकार को लंबे समय से विरोधी नीति वाला देश मानता रहा है और उसे आर्थिक रूप से अलग-थलग करने की कोशिश कर रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि इस टैरिफ आदेश से न केवल क्यूबा की अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी, बल्कि अमेरिका और लैटिन अमेरिकी देशों के संबंधों में भी तनाव बढ़ सकता है।