हमीरपुर, अरविन्द-:हमीरपुर जिले में बागवानी के प्रति किसानों और बागवानों का रुझान लगातार बढ़ता जा रहा है। इसका ताजा उदाहरण फलदार पौधों की रिकॉर्ड तोड़ मांग के रूप में सामने आया है। वर्ष 2025 के लिए बागवानी विभाग द्वारा 60 हजार फलदार पौधों के वितरण का लक्ष्य तय किया गया था, लेकिन बागवानों की बढ़ती दिलचस्पी के चलते यह लक्ष्य काफी पहले ही पार कर लिया गया। अब तक जिले में करीब 75 हजार फलदार पौधे वितरित किए जा चुके हैं और विभाग को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में यह संख्या और बढ़ सकती है।
बागवानी विभाग द्वारा हर वर्ष बरसात और सर्दियों के मौसम में फलदार पौधों का वितरण किया जाता है। इस समय सर्दियों में रोपण के लिए उपयुक्त पौधों की आपूर्ति की जा रही है, जिसे लेकर बागवानों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। हालांकि इस बार मानसून की बारिश समय पर न होने के कारण वितरण प्रक्रिया लगभग एक माह देरी से शुरू हुई, लेकिन इसके बावजूद पौधों की मांग पर कोई असर नहीं पड़ा। बागवानों ने देरी के बाद भी उत्साह के साथ पौधों की खरीद की, जिससे विभाग का लक्ष्य तय समय से पहले ही पूरा हो गया।
उद्यान विभाग हमीरपुर के उपनिदेशक राजेश्वर परमार ने बताया कि वर्ष 2025 के लिए 60 हजार फलदार पौधों के वितरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जबकि अब तक करीब 75 हजार पौधे बागवानों को उपलब्ध करवाए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि इस समय नए बगीचे लगाने के लिए परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल हैं, क्योंकि जमीन में पर्याप्त नमी मौजूद है। ऐसे में बागवान इस अवसर का अधिक से अधिक लाभ उठा सकते हैं।उपनिदेशक ने बागवानों को यह भी सलाह दी कि वे नए बगीचे लगाने के साथ-साथ पुराने बगीचों की देखभाल पर भी विशेष ध्यान दें। इस समय पुराने बगीचों में खाद डालना बेहद लाभकारी साबित होगा, जिससे फलों की गुणवत्ता के साथ-साथ उत्पादन में भी बढ़ोतरी होगी। उन्होंने कहा कि समय पर की गई देखभाल का असर आने वाले सीजन में साफ नजर आएगा।
बागवानी विभाग की ओर से बागवानों को किफायती दरों पर सेब, आड़ू, कीवी, प्लम सहित विभिन्न किस्मों के फलदार पौधे उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। बागवानी विशेषज्ञों का मानना है कि फलदार पौधों की बढ़ती मांग से न केवल जिले में बागवानी को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि किसानों और बागवानों की आय में भी उल्लेखनीय इजाफा होगा।सरकार और बागवानी विभाग की विभिन्न योजनाओं का लाभ उठाकर किसान अब परंपरागत खेती के साथ-साथ बागवानी को भी आय का मजबूत साधन बना रहे हैं। आने वाले वर्षों में इसका सकारात्मक असर जिले की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा और हमीरपुर बागवानी के क्षेत्र में एक नई पहचान स्थापित कर सकता है।