पंचकूला। हरियाणा सरकार द्वारा निजी विश्वविद्यालयों पर नियंत्रण के लिए लाए गए हरियाणा प्राइवेट यूनिवर्सिटी (संशोधन) एक्ट, 2025 को लेकर अब मामला अदालत पहुंच गया है। फरीदाबाद स्थित अल फलाह यूनिवर्सिटी ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर इस कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी है। यूनिवर्सिटी का कहना है कि यह संशोधन कानून राज्य सरकार को अत्यधिक अधिकार देता है, जिससे मनमानी की आशंका बढ़ जाती है।
याचिका में दावा किया गया है कि यह कानून संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 30 (अल्पसंख्यकों को शैक्षणिक संस्थान चलाने का अधिकार) का उल्लंघन करता है। यूनिवर्सिटी ने इसे भेदभावपूर्ण और मनमाना बताया है।
सरकार द्वारा पिछले साल दिसंबर में पारित इस संशोधन के तहत, यदि किसी निजी विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय सुरक्षा, कानून-व्यवस्था या अन्य विशेष परिस्थितियों से जुड़ा मामला सामने आता है, तो राज्य सरकार विश्वविद्यालय के प्रबंधन को भंग कर वहां अपना प्रशासन नियुक्त कर सकती है। अल फलाह यूनिवर्सिटी का तर्क है कि इन प्रावधानों की आड़ में सरकार किसी भी निजी संस्थान का नियंत्रण लंबे समय तक अपने हाथ में ले सकती है।
यूनिवर्सिटी ने यह भी स्पष्ट किया कि जिस मामले के बाद यह कानून लाया गया, उसमें टेरर लिंक की जांच के दौरान यूनिवर्सिटी के चार फैकल्टी मेंबर संदिग्ध पाए गए थे, लेकिन संस्थान ने उन्हें तुरंत नौकरी से हटा दिया था और जांच एजेंसियों को पूरा सहयोग दिया। इस पूरे मामले में हाईकोर्ट में अगली सुनवाई 6 मार्च को निर्धारित की गई है।