कीव । जिनेवा में प्रस्तावित त्रिपक्षीय वार्ता से ठीक पहले रूस ने यूक्रेन पर बड़ा और सुनियोजित हमला किया है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने दावा किया कि रूस ने यूक्रेन के विभिन्न इलाकों को निशाना बनाते हुए 29 मिसाइलें और करीब 400 ड्रोन दागे। इस हमले ने एक बार फिर शांति प्रयासों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
राष्ट्रपति जेलेंस्की के अनुसार, यूक्रेनी एयर डिफेंस सिस्टम ने शानदार कार्रवाई करते हुए 29 में से 25 मिसाइलों को हवा में ही मार गिराया, लेकिन इसके बावजूद हमले में बच्चों समेत नौ लोग घायल हो गए। कई रिहायशी इलाकों को नुकसान पहुंचा है और सार्वजनिक ढांचों पर भी असर पड़ा है।
जेलेंस्की ने सोशल मीडिया पर जारी वीडियो संदेश में कहा कि जिनेवा में नए कूटनीतिक प्रयास शुरू होने से ठीक पहले इस तरह का हमला रूस की वास्तविक मंशा को उजागर करता है। उन्होंने कहा कि यूक्रेन शांति वार्ता के लिए तैयार है, लेकिन रूस लगातार हमलों के जरिए हालात बिगाड़ने की कोशिश कर रहा है।
12 क्षेत्रों को बनाया निशाना, ऊर्जा ढांचे पर हमला
यूक्रेनी राष्ट्रपति ने बताया कि इस हमले में यूक्रेन के 12 क्षेत्रों को टारगेट किया गया। हमले का मुख्य उद्देश्य ऊर्जा ढांचे को नुकसान पहुंचाना था ताकि आम नागरिकों की जिंदगी प्रभावित हो सके। हमले के बाद कई इलाकों में बिजली और अन्य जरूरी सेवाओं पर असर देखा गया है।
ओडेसा में बिगड़े हालात, हजारों लोग प्रभावित
इस हमले का सबसे ज्यादा असर ओडेसा में देखने को मिला, जहां ड्रोन हमलों के कारण हजारों लोग पानी और हीटिंग सप्लाई से वंचित हो गए। रिपोर्ट के अनुसार, 10 से अधिक रिहायशी इमारतें और रेलवे से जुड़ा ढांचा भी क्षतिग्रस्त हुआ है।
यूक्रेन ने की प्रतिबंध बढ़ाने और सुरक्षा मजबूत करने की मांग
जेलेंस्की ने अंतरराष्ट्रीय साझेदार देशों से अपील की है कि रूस पर अधिक कड़े प्रतिबंध लगाए जाएं और यूक्रेन की वायु रक्षा प्रणाली को तुरंत मजबूत किया जाए। उन्होंने कहा कि जब अमेरिका समेत कई देश युद्ध रोकने की कोशिश कर रहे हैं, तब रूस का यह कदम शांति प्रयासों को कमजोर करने वाला है।
युद्ध जारी, वार्ता पर संकट के बादल
गौरतलब है कि फरवरी 2022 से यूक्रेन-रूस युद्ध लगातार जारी है। जिनेवा में होने वाली वार्ता अमेरिका की मध्यस्थता में युद्ध खत्म करने की दिशा में अहम मानी जा रही थी, लेकिन रूस के इस ताजा हमले के बाद शांति वार्ता की संभावनाओं पर फिर से संकट के बादल मंडराने लगे हैं।