फतेहाबाद। अतिरिक्त एवं सत्र न्यायधीश, स्पेशल जज-फास्ट ट्रैक अमित गर्ग ने 14 वर्षीय नाबालिग के साथ हुए यौन अपराध के मामले में आरोपी अभिजीत, निवासी ढाणी बस्ती भीमा, फतेहाबाद को दोषी ठहराते हुए 20 वर्ष का सश्रम कारावास और 1,70,000 रुपये का जुर्माना सुनाया। अदालत ने कहा कि बच्चों के प्रति अपराध पर किसी प्रकार की दया न्याय का मजाक होगा और ऐसे मामलों में कठोर सजा समाज में नीति और सुरक्षा संदेश स्थापित करती है।
मामले की पृष्ठभूमि:
13 अक्टूबर 2024 को पीड़िता के पिता ने हुडा चौकी में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप था कि आरोपी पिछले 10 महीनों से बच्ची को बहलाकर, लालच देकर स्कूल जाते समय शोषित करता रहा। 18 दिन पहले आरोपी ने पीड़िता को जबरन खेतों में ले जाकर दुष्कर्म किया और विरोध करने पर मारपीट की।
पुलिस और न्यायिक कार्रवाई:
उप-निरीक्षक राज बाला ने तफ्तीश पूरी कर आरोपी को 16 अक्टूबर 2024 को गिरफ्तार किया। अभियोजन पक्ष की पैरवी देवेंद्र मित्तल, जिला न्यायवादी और उप जिला न्यायवादी जगसीर सिंह बराड़ ने की। अदालत ने अपराध की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए सभी सजा प्रावधानों को लागू किया।
सजा और जुर्माना:
- पॉस्को अधिनियम धारा 4(2): 20 वर्ष सश्रम कारावास + 50,000 रुपये जुर्माना
- बीएनएस धारा 87: 10 वर्ष सश्रम कारावास + 50,000 रुपये जुर्माना
- धारा 137(2): 7 वर्ष सश्रम कारावास + 50,000 रुपये जुर्माना
- पॉस्को अधिनियम धारा 12: 3 वर्ष सश्रम कारावास + 20,000 रुपये जुर्माना
जुर्माना न चुकाने पर अतिरिक्त कारावास लागू होगा। अदालत ने कुल जुर्माने में से 1,00,000 रुपये पीड़िता को मुआवजे के रूप में देने और शेष 70,000 रुपये अदालती कार्यवाही की लागत के रूप में राज्य को जमा करने का आदेश दिया।
नीति और संदेश:
अभियोजन पक्ष ने कहा कि यह फैसला बच्चों की सुरक्षा, कानून की सख्ती और समाज में नीति स्थापित करने के लिए अहम है। अदालत ने स्पष्ट किया कि नाबालिगों के साथ अपराध पर दया समाज के लिए अस्वीकार्य है और कठोर न्याय ही संरक्षण की नीति का आधार है।