Summer express, मध्य पूर्व। बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच ईरान ने हिंद महासागर में स्थित रणनीतिक अमेरिकी-ब्रिटिश सैन्य ठिकाने डिएगो गार्सिया की ओर दो इंटरमीडिएट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। हालांकि, मिसाइलों का हमला सफल नहीं हो सका और बेस सुरक्षित रहा।
अंतर्राष्ट्रीय मीडिया के अनुसार, एक मिसाइल उड़ान के दौरान ही विफल हो गई। दूसरी मिसाइल को रोकने के लिए अमेरिकी युद्धपोत ने SM-3 इंटरसेप्टर दागा। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि दूसरी मिसाइल पूरी तरह नष्ट हुई या नहीं।
डिएगो गार्सिया हिंद महासागर में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक सैन्य अड्डा है। यहां अमेरिका और ब्रिटेन की संयुक्त मौजूदगी है, और यह बेस एशिया और मध्य पूर्व में सैन्य ऑपरेशनों के लिए अत्यंत अहम माना जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान का यह कदम क्षेत्र में तनाव और सुरक्षा जोखिम को बढ़ा सकता है। इस हमले से वैश्विक समुद्री मार्गों और रणनीतिक सैन्य ठिकानों की सुरक्षा पर भी सवाल उठे हैं।
डिएगो गार्सिया बेस का नियंत्रण अमेरिका और ब्रिटेन के हाथ में है और यह हवाई और समुद्री दोनों तरह के ऑपरेशनों के लिए केंद्र के रूप में काम करता है। अमेरिकी अधिकारियों ने कहा है कि बेस की सुरक्षा मजबूत है और किसी भी संभावित खतरे का समय रहते सामना किया गया।
इस घटना के बाद अमेरिका और ब्रिटेन ने अपनी रक्षा तैयारियों को और सख्त कर दिया है। क्षेत्रीय देशों में भी निगरानी बढ़ा दी गई है।
विश्लेषकों का मानना है कि ईरान की इस कार्रवाई का मकसद क्षेत्र में शक्ति संतुलन दिखाना और अमेरिका-नाटो गठबंधन को चेतावनी देना हो सकता है। यह हमला हिंद महासागर में बढ़ते तनाव और भू-राजनीतिक सुरक्षा खतरों को उजागर करता है।