गोवर्धन योजना से बदली तस्वीर: यमुनानगर के सदूरा में बायोगैस प्लांट शुरू, LPG पर निर्भरता घटी

Karuna
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Summer Express - गोवर्धन योजना से बदली तस्वीर: यमुनानगर के सदूरा में बायोगैस प्लांट शुरू, LPG पर निर्भरता घटी

Summer express,यमुनानगर  | यमुनानगर जिले के रादौर उपमंडल के सदूरा गांव में केंद्र सरकार की गोवर्धन योजना के तहत स्थापित बायोगैस प्लांट ग्रामीण विकास और आत्मनिर्भरता की नई मिसाल बनकर उभरा है। महंगे एलपीजी सिलेंडरों की बढ़ती समस्या के बीच यह परियोजना गांव के लोगों के लिए सस्ती और पर्यावरण अनुकूल ऊर्जा का प्रभावी विकल्प साबित हो रही है।

करीब 1000 की आबादी वाले इस गांव में फिलहाल ट्रायल के तौर पर 46 घरों को बायोगैस कनेक्शन दिए जा चुके हैं। शुरुआती परिणाम उत्साहजनक हैं और लक्ष्य रखा गया है कि अगले छह महीनों में पूरे गांव को इस सुविधा से जोड़ दिया जाएगा। इससे न केवल रसोई खर्च में कमी आएगी, बल्कि एलपीजी पर निर्भरता भी काफी हद तक घटेगी।

लगभग एक एकड़ क्षेत्र में स्थापित इस प्लांट पर करीब 80 लाख रुपये की लागत आई है। प्लांट में पशुओं के गोबर से गैस तैयार की जाती है, जिसमें एक क्विंटल गोबर से करीब दो किलो गैस का उत्पादन संभव है। खास बात यह है कि ग्रामीण 25 पैसे प्रति किलो की दर से गोबर बेचकर अतिरिक्त आय भी कमा सकते हैं। जरूरत पड़ने पर बाहर से भी गोबर की आपूर्ति की व्यवस्था की गई है।

इस योजना से गांव में स्वच्छता व्यवस्था में भी सुधार देखने को मिल रहा है। गोबर का सही उपयोग होने से गंदगी कम होगी और बीमारियों के फैलने का खतरा भी घटेगा। साथ ही प्लांट से निकलने वाली जैविक खाद किसानों के लिए फायदेमंद साबित होगी, जिससे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होगी।

पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से भी यह पहल अहम मानी जा रही है। बायोगैस के उपयोग से प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी। वहीं, पशुपालन को भी बढ़ावा मिलेगा क्योंकि गोबर अब आय का स्रोत बन रहा है।

सरपंच जसविंद्र सिंह के अनुसार, यह योजना गांव के समग्र विकास के लिए लाभकारी है, हालांकि इसके सुचारू संचालन के लिए अतिरिक्त बजट और सुरक्षा व्यवस्था की जरूरत है। प्रोजेक्ट कंसल्टेंट अमित कादियान ने बताया कि ट्रायल सफल रहा है और ग्रामीणों का सहयोग मिल रहा है।

कुल मिलाकर, सदूरा का यह बायोगैस प्रोजेक्ट ऊर्जा आत्मनिर्भरता, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का एक सफल मॉडल बनकर उभर रहा है, जो अन्य गांवों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है।

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