शिमला ,संजू -: राजधानी शिमला में लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे दृष्टिबाधित बेरोजगारों का धैर्य आखिरकार टूट गया। करीब 900 दिनों से धरने पर बैठे इन प्रदर्शनकारियों ने सोमवार को सड़कों पर उतरकर सचिवालय से मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच किया और घेराव का प्रयास किया।
प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग बैकलॉग पदों को भरने और उन्हें रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाने की है। जैसे ही वे मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़े, पुलिस ने उन्हें बीच रास्ते में रोक लिया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हल्की धक्का-मुक्की भी देखने को मिली, जिससे मौके पर तनावपूर्ण स्थिति बन गई।
दृष्टिबाधित संघ के सदस्य राजेश ठाकुर ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके साथ लगातार भेदभावपूर्ण रवैया अपनाया जा रहा है। उन्होंने मांग की कि वर्ष 1995 से 2026 तक लंबित पड़े बैकलॉग पदों को जल्द से जल्द भरा जाए। उनका कहना है कि सरकार अन्य वर्गों के लिए भर्तियां कर रही है, लेकिन क्लास-4 के उन पदों को नजरअंदाज किया जा रहा है, जिनके लिए दृष्टिबाधित योग्य हैं।उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पूर्व में शुरू की गई ‘सहारा योजना’ पिछले करीब 10 महीनों से बंद पड़ी है, जिससे कई जरूरतमंद परिवारों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा प्रशासनिक खामियों की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि UDID कार्ड में दिव्यांगता 90 प्रतिशत दर्ज है, जबकि बस पास में इसे केवल 70 प्रतिशत दिखाया जा रहा है, जो गंभीर लापरवाही है।
राजेश ठाकुर ने बताया कि इतने लंबे आंदोलन के दौरान सरकार के साथ केवल एक बार 12 फरवरी 2024 को बैठक हुई थी, जिसमें 29 फरवरी तक समाधान का आश्वासन दिया गया था और विशेष भर्ती मेला आयोजित करने की बात कही गई थी। लेकिन अब अप्रैल 2026 तक भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।