Summer Express, नई दिल्ली । भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने वित्त वर्ष 2027 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि को लेकर नए जोखिमों की ओर संकेत किया है। उन्होंने चेतावनी दी कि होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी तरह की रुकावट का सीधा असर देश की महंगाई, व्यापार और समग्र आर्थिक गतिविधियों पर पड़ सकता है।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में अस्थायी युद्धविराम के बाद कच्चे तेल की कीमतों में नरमी देखी जा रही है और वैश्विक बाजारों में सकारात्मक माहौल बना हुआ है। इसके बावजूद केंद्रीय बैंक का रुख सतर्क बना हुआ है।
आरबीआई ने वित्त वर्ष 2027 के लिए देश की जीडीपी वृद्धि दर लगभग 6.9 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। हालांकि, बैंक ने यह भी कहा है कि बाहरी परिस्थितियों से जुड़े जोखिम अभी भी बने हुए हैं और वैश्विक अनिश्चितता का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, दुनिया के प्रमुख तेल आपूर्ति मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी प्रकार की बाधा से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आ सकती है। इससे भारत का आयात बिल बढ़ेगा और महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है। साथ ही सप्लाई चेन में व्यवधान, परिवहन और बीमा लागत में वृद्धि तथा आवश्यक वस्तुओं के आयात पर असर जैसे कारक आर्थिक विकास को प्रभावित कर सकते हैं।
अमेरिका और ईरान के बीच हालिया युद्धविराम के बाद भले ही बाजारों में कुछ राहत देखी गई हो, लेकिन आरबीआई का मानना है कि भू-राजनीतिक तनाव फिर से बढ़ने की संभावना को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यही कारण है कि केंद्रीय बैंक मौजूदा परिस्थितियों को लेकर सतर्क दृष्टिकोण बनाए हुए है।