Summer express,धर्मशाला/राहुल चावला-: हिमाचल प्रदेश के सबसे बड़े जिला कांगड़ा में संचालित सरकारी विद्यालयों की स्थिति को लेकर किए गए सामाजिक अंकेक्षण (सोशल ऑडिट) ने शिक्षा व्यवस्था की कई गंभीर कमियों को उजागर किया है।सर्व शिक्षा अभियान (एसएसए) के तहत संचालित स्कूलों में आधारभूत सुविधाओं, छात्र सुरक्षा और शैक्षणिक गुणवत्ता से जुड़े कई चिंताजनक तथ्य सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार बड़ी संख्या में विद्यालय आज भी न्यूनतम सुविधाओं से वंचित हैं, जिससे शिक्षा के अधिकार अधिनियम (आरटीई) के प्रभावी क्रियान्वयन पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
धर्मशाला में आयोजित जनसुनवाई के दौरान सामाजिक अंकेक्षण की विस्तृत रिपोर्ट सार्वजनिक की गई। इस कार्यक्रम में दो हजार से अधिक अभिभावकों, शिक्षकों, स्कूल प्रबंधन समिति (एसएमसी) के सदस्यों, जनप्रतिनिधियों तथा शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने भाग लिया। उपायुक्त कांगड़ा हेमराज बैरवा ने भी रिपोर्ट का अवलोकन किया और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए।सामाजिक अंकेक्षण के तहत हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की टीम ने जिले के कुल 2,364 विद्यालयों में से 519 विद्यालयों का सर्वेक्षण और मूल्यांकन किया। सोशल ऑडिट से जुड़े सीएसए सदस्य हिमांशु ने बताया कि जांच में पाया गया कि 44 प्रतिशत विद्यालयों में पर्याप्त कक्षाओं और स्टाफ रूम की सुविधा उपलब्ध नहीं है। वहीं 27 प्रतिशत स्कूलों में छात्रों के लिए पर्याप्त फर्नीचर भी नहीं है।रिपोर्ट में छात्र सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे भी सामने आए हैं। सर्वेक्षण किए गए 78 प्रतिशत से अधिक विद्यालयों में चारदीवारी या सुरक्षा बाड़ नहीं है। इसके अलावा 65 प्रतिशत विद्यालय ऐसे हैं जहां तक मोटर योग्य सड़क नहीं पहुंचती। इससे विद्यार्थियों, विशेषकर दिव्यांग और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को स्कूल पहुंचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।मूलभूत सुविधाओं की स्थिति भी संतोषजनक नहीं पाई गई। करीब 9 प्रतिशत विद्यालयों में छात्राओं के लिए अलग शौचालय उपलब्ध नहीं हैं, जबकि इतने ही स्कूलों में स्वच्छ पेयजल की सुविधा का अभाव है। दो प्रतिशत विद्यालयों में मध्याह्न भोजन योजना के लिए रसोईघर तक नहीं है। किशोरियों के स्वास्थ्य और स्वच्छता से जुड़े प्रबंध भी कमजोर पाए गए। 40 प्रतिशत से अधिक विद्यालयों में सैनिटरी पैड की उपलब्धता नहीं है।
रिपोर्ट के अनुसार लगभग एक-तिहाई विद्यालयों में स्कूल सुरक्षा समितियों का गठन नहीं किया गया है। कई स्कूलों में शिकायत और सुझाव पेटियां भी नहीं हैं, जिससे विद्यार्थियों और अभिभावकों की समस्याओं के समाधान की व्यवस्था कमजोर बनी हुई है। इसके अलावा किसी भी सर्वेक्षित विद्यालय में पेशेवर काउंसलिंग सेवाएं उपलब्ध नहीं मिलीं। 80 प्रतिशत से अधिक विद्यालय निर्धारित मानकों के अनुरूप पुस्तकालय सुविधाएं उपलब्ध कराने में भी असफल पाए गए।
सामाजिक अंकेक्षण में शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक अधीनस्थ शिक्षा अधिकारियों द्वारा विद्यालयों का नियमित निरीक्षण नहीं किया जा रहा है। सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों के संचालन में भी कमी देखी गई। वहीं ‘वन नेशन, ग्रेट नेशन’ कार्यक्रम का पालन लगभग 48 प्रतिशत विद्यालयों में नहीं हो रहा है।जनसुनवाई के दौरान अभिभावकों और स्थानीय लोगों ने विद्यालयों में आधारभूत ढांचे को मजबूत करने, परिवहन सुविधाएं बढ़ाने, निगरानी व्यवस्था सुधारने और शिक्षा प्रणाली में जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की। सामाजिक अंकेक्षण रिपोर्ट अब आगे की कार्रवाई के लिए राज्य शिक्षा विभाग को भेजी जाएगी।