मेडिकल डिवाइस पार्क और किशाऊ बांध पर CM सुक्खू का भाजपा पर हमला,बोले- प्रदेश हितों से नहीं होने देंगे समझौता

Chandrika
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Summer express/शिमला, संजू -:प्रदेश विश्वविद्यालय में आयोजित उद्घाटन और शिलान्यास कार्यक्रम में पहुंचे मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने मेडिकल डिवाइस पार्क और किशाऊ बांध परियोजना को लेकर पूर्व भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने हिमाचल प्रदेश के हितों के साथ समझौता किया, जबकि उनकी सरकार प्रदेश और आने वाली पीढ़ियों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।

मीडिया से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री ने नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर के बयानों पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अब वे जयराम ठाकुर के बयानों को गंभीरता से नहीं लेते हैं और उनकी सरकार तथ्यों के आधार पर फैसले ले रही है।

मुख्यमंत्री ने अपने विश्वविद्यालय के दिनों को याद करते हुए कहा कि प्रदेश विश्वविद्यालय के कुलपति उनके पुराने साथी रहे हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने कुलपति को ग्रीन हाइड्रोजन और इलेक्ट्रिक व्हीकल जैसे भविष्य के क्षेत्रों में शोध को बढ़ावा देने का सुझाव दिया था। मुख्यमंत्री ने खुशी जताई कि विश्वविद्यालय इन विषयों पर गंभीरता से काम कर रहा है।इस अवसर पर विश्वविद्यालय में अत्याधुनिक कंप्यूटर लैब और डीबीटी टेस्ट लैब का उद्घाटन भी किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले शिमला और आसपास के विद्यार्थियों को विभिन्न प्रतियोगी और तकनीकी परीक्षाओं के लिए दूसरे शहरों का रुख करना पड़ता था, लेकिन अब यह सुविधा स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होगी। उन्होंने कहा कि इससे छात्रों का समय और आर्थिक संसाधन दोनों बचेंगे।विश्वविद्यालय में फीस वृद्धि के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि करीब दस वर्षों के बाद बहुत सीमित बढ़ोतरी की गई है। उन्होंने कहा कि वे स्वयं छात्र राजनीति से निकले हैं और छात्रों की भावनाओं को अच्छी तरह समझते हैं। यदि किसी स्तर पर छात्रों की ओर से उचित सुझाव आते हैं तो सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन उस पर विचार कर सकते हैं।

मेडिकल डिवाइस पार्क परियोजना का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने पूर्व भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि इस परियोजना के तहत प्रदेश को केंद्र सरकार से 100 करोड़ रुपये मिले थे, लेकिन इसके लिए उद्योगों को मात्र एक रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से भूमि उपलब्ध कराने और तीन रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली देने जैसी शर्तें स्वीकार की गई थीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि वे मुख्यमंत्री रहते हुए प्रदेश की बहुमूल्य भूमि और संसाधनों को इस तरह नहीं सौंप सकते। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने हजारों करोड़ रुपये मूल्य की भूमि को बेहद कम कीमत पर देने की सहमति जताई थी, जो प्रदेश के हित में नहीं था।

जल विद्युत परियोजनाओं की रॉयल्टी के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। उन्होंने बताया कि इस विषय पर केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर से विस्तृत चर्चा की गई है। मुख्यमंत्री के अनुसार, प्रदेश में 40 वर्ष पूरे कर चुके जल विद्युत प्रोजेक्ट्स को विस्तार अवधि के दौरान 20 प्रतिशत रॉयल्टी देनी होगी। साथ ही 60 वर्ष पूरे होने के बाद परियोजनाएं राज्य सरकार को हस्तांतरित की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जो परियोजनाएं 12 प्रतिशत रॉयल्टी पर संचालित हो रही हैं और कर्जमुक्त हो चुकी हैं, उनकी रॉयल्टी में भी बढ़ोतरी की जानी चाहिए।

किशाऊ बांध परियोजना पर मुख्यमंत्री ने कहा कि इस विषय में अधूरी और भ्रामक जानकारी फैलाई जा रही है। उन्होंने बताया कि यह परियोजना उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर बन रही है, जबकि इसका लाभ दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान जैसे राज्यों को भी मिलेगा। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि पूर्व भाजपा सरकार ने परियोजना से उत्पन्न होने वाली बिजली की लागत वहन करने पर सहमति दे दी थी। उन्होंने कहा कि सत्ता में आते ही उनकी सरकार ने इस मुद्दे को उठाया और लंबी बातचीत के बाद हिमाचल के लिए बेहतर शर्तें सुनिश्चित कीं। मुख्यमंत्री के अनुसार, अब प्रदेश को परियोजना से 211 मेगावाट मुफ्त बिजली मिलेगी और अगले कुछ वर्षों में राज्य को लगभग 600 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय प्राप्त होगी, जिसे उन्होंने हिमाचल की बड़ी जीत बताया।

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