सुपर-स्पेशियलिटी डॉक्टरों को मिलेगा नॉन-प्रैक्टिसिंग अलाउंस, स्वास्थ्य सेवाओं के आधुनिकीकरण पर सरकार का जोर

Chandrika
3 Min Read

Summer express/ शिमला, संजू -: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से सुपर-स्पेशियलिटी चिकित्सकों को नॉन-प्रैक्टिसिंग अलाउंस (एनपीए) प्रदान करने की घोषणा की है। यह घोषणा उन्होंने स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए की। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेशवासियों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य क्षेत्र के विकास के लिए धन की कोई कमी नहीं रहने दी जाएगी। पिछले साढ़े तीन वर्षों के दौरान स्वास्थ्य अवसंरचना को मजबूत करने और सेवाओं में सुधार के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं, जिनके सकारात्मक परिणाम अब दिखाई देने लगे हैं।

मुख्यमंत्री ने बताया कि स्वास्थ्य सुधारों को लेकर चिकित्सकों के साथ विस्तृत विचार-विमर्श किया गया है। आगामी महीनों में वह स्वयं विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों का दौरा कर डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों से संवाद करेंगे तथा स्वास्थ्य सेवाओं के आधुनिकीकरण और सुदृढ़ीकरण के लिए नई कार्ययोजना तैयार करेंगे।मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों को पर्याप्त मानव संसाधन और अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरणों से सुसज्जित किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य इन्हें अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), नई दिल्ली के स्तर तक विकसित करना है। इसके लिए राज्य सरकार आधुनिक चिकित्सा मशीनरी और उपकरणों की खरीद पर लगभग 3,000 करोड़ रुपये खर्च कर रही है।उन्होंने कहा कि जिन जिलों में मेडिकल कॉलेज नहीं हैं, वहां क्षेत्रीय और जोनल अस्पतालों की सुविधाओं को भी उन्नत बनाया जा रहा है ताकि लोगों को अपने जिले में ही बेहतर उपचार उपलब्ध हो सके। साथ ही स्वास्थ्य संस्थानों में डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ और तकनीशियनों की कमी दूर करने के लिए विभिन्न भर्ती प्रक्रियाएं तेजी से आगे बढ़ाई जा रही हैं।मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार के प्रयासों से प्रदेश में पहली बार रोबोटिक सर्जरी की सुविधा शुरू की गई है। इससे पहले ऐसी उन्नत चिकित्सा सेवाओं के लिए मरीजों को प्रदेश से बाहर जाना पड़ता था और भारी खर्च वहन करना पड़ता था।

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए कि सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों का वर्गीकरण संबंधित क्षेत्रों की जनसंख्या के आधार पर किया जाए। इससे वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप स्टाफ और आधारभूत सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकेगी तथा लोगों को अपने घरों के निकट ही गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त होंगी।बैठक में ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह, महाधिवक्ता अनूप रतन, विशेष सचिव डॉ. अश्विनी कुमार शर्मा, जितेंद्र सांजटा, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के प्रबंध निदेशक प्रदीप ठाकुर, हिमाचल प्रदेश मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक दिव्यांशु सिंगल सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

Share This Article
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *