शिमला, संजू-:नगर निगम शिमला की मासिक बैठक बुधवार को हलवे की मिठास के साथ शुरू हुई, लेकिन कुछ ही देर में सदन का माहौल पूरी तरह सियासी अखाड़े में बदल गया। बजट सत्र के बाद आयोजित इस बैठक में शुरुआत में भाजपा पार्षद सरोज ठाकुर के जन्मदिन के अवसर पर सदन में हलवा वितरित किया गया। हालांकि, कार्यवाही शुरू होते ही मेयर के कार्यकाल को लेकर उठा विवाद इतना बढ़ा कि नारेबाजी, तीखी बहस और अंततः निलंबन की कार्रवाई तक बात पहुंच गई।
बैठक की शुरुआत में ही भाजपा पार्षद सरोज ठाकुर ने सवाल उठाया कि मेयर का कार्यकाल ढाई वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष करने से संबंधित विधेयक पर अभी तक राज्यपाल के हस्ताक्षर नहीं हुए हैं। ऐसे में मौजूदा मेयर किस अधिकार से पद पर बने हुए हैं और सदन की कार्यवाही चला रहे हैं। उनका कहना था कि मेयर का निर्धारित कार्यकाल समाप्त हो चुका है, इसलिए उन्हें पद पर बने रहने का कोई वैधानिक अधिकार नहीं है।इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के पार्षदों के बीच तीखी बहस छिड़ गई। देखते ही देखते बहस नारेबाजी में बदल गई। भाजपा पार्षदों ने मेयर के खिलाफ जोरदार विरोध जताया, जबकि कांग्रेस पार्षदों ने भी पलटवार करते हुए विपक्ष पर विकास कार्यों में बाधा डालने का आरोप लगाया। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि कुछ समय के लिए सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर भी विवाद थमा नहीं। भाजपा पार्षदों ने दोबारा नारेबाजी शुरू कर दी और आरोप लगाया कि रोस्टर प्रणाली के अनुसार ढाई वर्ष बाद मेयर का पद महिला के लिए आरक्षित होना था। इसके बावजूद वर्तमान मेयर पद पर बने हुए हैं, जो नियमों के विरुद्ध है। विपक्ष ने इसे महिला अधिकारों के साथ अन्याय करार दिया।
हंगामे के बीच मेयर सुरेंद्र चौहान ने सख्त रुख अपनाते हुए कृष्णानगर वार्ड से भाजपा पार्षद बिट्टू कुमार पाना को दो बैठकों के लिए निलंबित करने की घोषणा कर दी। मेयर के इस फैसले के बाद सदन का माहौल और अधिक गरमा गया। भाजपा पार्षदों ने इसे तानाशाही करार दिया और नारेबाजी करते हुए सदन से बहिर्गमन कर दिया।निलंबन के बाद भाजपा पार्षद बिट्टू कुमार पाना ने कहा कि उन्हें यह तक स्पष्ट नहीं किया गया कि आखिर किस आधार पर उन्हें निलंबित किया गया है। उनका आरोप था कि सदन में हंगामा केवल इस बात पर हुआ कि मेयर का कार्यकाल समाप्त हो चुका है और वे नियमों के विरुद्ध कुर्सी पर बैठे हैं। उन्होंने कहा कि जब तक इस विषय पर स्पष्टता नहीं आती, वे सदन की कार्यवाही नहीं चलने देंगे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि संभव है उनका निलंबन दलित होने के कारण किया गया हो, हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि मेयर के पास इस प्रकार निलंबन का अधिकार ही नहीं है।
वहीं भाजपा पार्षद सरोज ठाकुर ने कहा कि उनका विरोध किसी व्यक्तिगत कारण से नहीं, बल्कि संवैधानिक और प्रक्रियात्मक आधार पर है। उनका कहना था कि सरकार द्वारा कार्यकाल बढ़ाने के लिए लाया गया अध्यादेश 6 जनवरी को समाप्त हो चुका है। ऐसे में अध्यादेश की समय-सीमा खत्म होने के बाद मेयर पद पर बने नहीं रह सकते। उन्होंने कहा कि जब तक कोई वैध प्राधिकृत व्यक्ति सदन की कार्यवाही नहीं चलाएगा, वे बैठक में भाग नहीं लेंगी। उन्होंने यह भी बताया कि यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है।दूसरी ओर, मेयर सुरेंद्र चौहान ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि शहर के विकास कार्य किसी भी कीमत पर रुकने नहीं दिए जाएंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे पहले भी बजट बैठक के दौरान विपक्ष ने हंगामा किया और बजट पर सार्थक चर्चा नहीं होने दी। उनका कहना था कि जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों का दायित्व है कि वे विकास के मुद्दों पर गंभीरता से चर्चा करें, न कि केवल राजनीतिक विवाद खड़े करें।
मेयर ने स्पष्ट किया कि सदन की गरिमा बनाए रखने और नियमों के तहत ही बिट्टू कुमार पाना को दो बैठकों के लिए निलंबित किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि वे राज्यपाल और न्यायालय से अनुरोध करेंगे कि इस पूरे प्रकरण पर शीघ्र निर्णय लिया जाए, ताकि नगर निगम की कार्यवाही सुचारु रूप से चल सके।
फिलहाल, कार्यकाल विवाद और निलंबन की कार्रवाई ने नगर निगम की राजनीति को गर्मा दिया है। अब सबकी निगाहें न्यायालय और राज्यपाल के निर्णय पर टिकी हैं, जिससे इस संवैधानिक और राजनीतिक विवाद का समाधान निकल सके।