Summer express,Monika Rawat, चंडीगढ़। कोटक महिंद्रा बैंक में हुए 150 करोड़ के घोटाले में कार्रवाई को तेज करते हुए हरियाणा विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन ब्यूरो ने चार्जशीट दाखिल कर दी है। सोमवार की देरशाम पंचकूला कोर्ट में दाखिल की गई चार्जशीट में वित्तीय घोटाले के मामले में नौ लोगों के आरोपी बनाया गया है। इनमें कोटक महिंद्रा बैंक की पंचकूला सेक्टर 11 शाखा के तत्कालीन ब्रांच मैनेजर और घोटाले के कथित मास्टरमाइंड पुष्पेंद्र सिंह शामिल हैं।
यह घोटाल आईएएस आर के सिंह के कार्यकाल के दौरान हुआ था। आर सिंह को सीबीआई पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। एसीबी की चार्जशीट के अनुसार बैंक में डिप्टी वाइस-प्रेसीडेंट के तौर पर काम कर रहे पुष्पेंद्र सिंह पर आरोप है कि उन्होंने फर्जी बैंक खातों और कई चरणों वाले वित्तीय लेन-देन के ज़रिए नगर निकाय की फिक्स्ड डिपॉज़िट से सरकारी फंड की हेराफेरी की। नगर निगम के सीनियर अकाउंट्स ऑफिसर विकास कौशिक का नाम भी मुख्य आरोपियों में शामिल है।
चार्जशीट के मुताबिक,पंचकूला निगम ने बैंक में 16 फिक्स्ड डिपॉजिट करा रखी थीं, जिनकी कुल रकम 145.03 करोड़ रुपये थी और मैच्योरिटी पर इनकी कीमत 158.02 करोड़ रुपये होनी थी। शक तब हुआ जब 16 फरवरी को 59.58 करोड़ रुपये की 11 फिक्स्ड डिपॉजिट मैच्योर हुईं और नगर निकाय के अधिकारियों को कथित तौर पर ऐसे बैंक स्टेटमेंट दिए गए जो निगम के रिकॉर्ड से मेल नहीं खाते थे।
जांच में पता चला कि पुष्पेंद्र सिंह ने विकास कौशिक के साथ मिलकर एमसी पंचकूला के नाम पर दो फर्जी बैंक खाते खोले और असली खातों से सरकारी फंड को इन फर्जी खातों में ट्रांसफर किया। इसके बाद यह पैसा निजी लोगों के खातों में भेजा गया और आखिरकार सिंह तक पहुंचा।
चार्जशीट में पूर्व रिलेशनशिप मैनेजर दिलीप राघव, स्वाति तोमर, रजत डाहरा, कपिल कुमार, सोनिया, प्रियंका रायजादा और नेहा समर रंगा को भी आरोपियों के तौर पर शामिल किया गया है।
जांचकर्ताओं ने बताया कि रजत डाहरा को 88.17 करोड़ रुपये, स्वाति तोमर को 31.58 करोड़ रुपये, कपिल कुमार को 2.36 करोड़ रुपये और राजपुरा के रहने वाले विनोद कुमार को 1.41 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए थे। विनोद कुमार की 17 अगस्त, 2024 को मौत हो गई थी।
एसीबी के मुताबिक, रजत डाहरा ने स्वाति तोमर और कपिल कुमार को बैंक खाते खोलने के लिए काम पर रखा था, जिनका इस्तेमाल हेराफेरी किए गए फंड को इधर-उधर भेजने के लिए किया गया। जांच में यह भी आरोप लगाया गया है कि डहरा और पुष्पेंद्र सिंह ने कई बैंकिंग ट्रांजेक्शन करने और पैसों के लेन-देन का पता छिपाने के लिए उनसे साइन किए हुए खाली चेक और सिम कार्ड लिए थे।
जांच में यह भी पता चला कि सिंह को कथित तौर पर धोखाधड़ी से मिले पैसों में से लगभग 33 करोड़ रुपये मिले थे। इन पैसों का इस्तेमाल कथित तौर पर लग्जऱी गाडिय़ां खरीदने और अचल संपत्ति के लिए बड़ी रकम चुकाने में किया गया था। चार्जशीट में कहा गया है कि ये संपत्तियां मार्च 2026 तक बेच दी गई थीं।
दलीप राघव ने कथित तौर पर एमसी पंचकूला के अधिकारियों के नकली सरकारी स्टैम्प का इंतज़ाम किया, फर्जी बैंक खाते खुलवाने में मदद की, नकली बैंक स्टेटमेंट जमा किए, फर्जी डेबिट लेटर तैयार किए और सरकारी बातचीत को दूसरी तरफ मोडऩे के लिए कॉरपोरेशन का रजिस्टर्ड ईमेल एड्रेस बदल दिया।
खरड़ की रहने वाली सोनिया को कथित तौर पर दो फर्जी चेक के ज़रिए 50 लाख रुपये मिले और उसने यह रकम दूसरे खातों में ट्रांसफर कर दी। जांच में यह भी पता चला कि आखिर में लगभग 70 करोड़ रुपये सनी गर्ग और प्रियंका गर्ग के पास भेजे गए। जांचकर्ताओं का आरोप है कि पुष्पेंद्र सिंह ने सनी गर्ग को दिए गए बिना गारंटी वाले लोन पर ब्याज भी लिया था। कहा जाता है कि यह धोखाधड़ी 2018 से चल रही थी।